Bihar News : तीसरी बार हड़ताल पर जायेंगे राज्य के पंचायत सचिव, एकमुश्त ट्रांसफर के लिए इस दिन तक के लिए सरकार को दिया अल्टीमेटम

Bihar News : बिहार के पंचायत सचिवों ने एक बार फिर हड़ताल पट जाने की धमकी दी है. उन्होने एकमुश्त ट्रांसफर के लिए इस दिन तक के लिए बिहार सरकार को अल्टीमेटम दिया है........पढ़िए आगे

हड़ताल की धमकी - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : 'बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ' ने सरकार के खिलाफ एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो राज्य के तमाम पंचायत सचिव तीसरी बार सामूहिक अवकाश और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस संबंध में संघ की ओर से सरकार को अल्टीमेटम दिया गया है, जिससे पंचायती राज विभाग के कामकाज ठप होने की संभावना है।

बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ के प्रदेश अध्यक्ष बिरेन्द्र कुमार के अनुसार, पंचायती राज विभाग द्वारा पूर्व में हुए समझौतों को लागू नहीं किए जाने के कारण कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। विभाग ने 15 मई 2025 और 27 मई 2026 को संघ के साथ आधिकारिक समझौते किए थे, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बाद भी उन्हें धरातल पर नहीं उतारा गया। इसी वादाखिलाफ़ी के विरोध में संघ ने 14 जुलाई 2026 को पत्रांक-141 के माध्यम से विभागीय मंत्री को पत्र सौंपकर अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने यह भी कहा की राज्य के मुख्य सचिव ने इसके लिए विभागीय सचिव को निर्देश दिया है। इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। 

संघ ने अन्य विभागों का उदाहरण देते हुए सरकार की दोहरी नीति पर तीखे सवाल उठाए हैं। प्रदेश अध्यक्ष बिरेन्द्र कुमार ने स्पष्ट किया कि जब बिहार सरकार के 'राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग' द्वारा अपने 3,268 कर्मियों का एकमुश्त स्थानांतरण किया जा सकता है, तो फिर पंचायती राज विभाग द्वारा 2,005 पंचायत सचिवों का एकमुश्त स्थानांतरण करने में क्यों आनाकानी की जा रही है? संघ ने इसे पंचायत सचिवों के साथ सीधे तौर पर भेदभाव बताया है।

संघ ने सरकार को आखिरी चेतावनी देते हुए डेडलाइन तय कर दी है। पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि यदि विभाग आगामी 25 जुलाई 2026 तक सभी 2,005 पंचायत सचिवों के एकमुश्त स्थानांतरण की मांग को पूरा नहीं करता है, तो 26 जुलाई 2026 से राज्य के सभी पंचायत सचिव एक साथ सामूहिक अवकाश और पूर्ण हड़ताल पर चले जाएंगे। संघ ने स्पष्ट किया है कि इससे उत्पन्न होने वाले किसी भी प्रशासनिक संकट की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ पंचायती राज विभाग की होगी।

गौरतलब है कि इससे पहले भी पंचायत सचिव अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत थे, लेकिन शीर्ष अधिकारियों के भरोसे के बाद वे काम पर वापस आए थे। संघ का कहना है कि मंत्री, सचिव और निदेशक के ठोस आश्वासन पर ही सभी पंचायत सचिव 30 मई 2026 से काम पर लौटे थे। परंतु, डेढ़ महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी आश्वासन पूरा न होने से कर्मचारी ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।