तेज प्रताप यादव का नीतीश युग पर तंज , क्या कहा लालू के बड़े लाल ने? बयान ने बढ़ा दी हलचल
Bihar Politics: लंबे समय तक खामोश रहने के बाद अब तेज प्रताप यादव ने भी तंज कसते हुए माहौल को और गर्मा दिया है।
Bihar Politics: पटना की सरज़मीं इस वक्त सियासी तापमान के काफी तेज है। सत्ता परिवर्तन की आहट और नए निज़ाम के ऐलान से पहले राजधानी में वीआईपी मूवमेंट ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को चौकन्ना कर दिया है। एक तरफ नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारियाँ आख़िरी पड़ाव में पहुंच चुकी हैं, तो दूसरी तरफ सियासत के गलियारों में बयानबाज़ी और बैठकों का दौर तेज हो गया है।
इन्हीं राजनीतिक गतिविधियों के बीच अब एक नया सियासी बयान भी सुर्खियों में है। लंबे समय तक खामोश रहने के बाद अब तेज प्रताप यादव ने भी तंज कसते हुए माहौल को और गर्मा दिया है। पत्रकारों द्वारा नीतीश कुमार पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने तीखे अंदाज़ में कहा “इस्तीफा देने जा रहे हैं, अब पता नहीं उनके दिमाग में क्या है?”
यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब सत्ता परिवर्तन अपने अंतिम चरण में है और हर राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटा है। तेज प्रताप का यह तंज न सिर्फ राजनीतिक बहस को हवा दे रहा है, बल्कि बिहार की सियासत में एक नया नैरेटिव भी खड़ा कर रहा है।
इसी हलचल के बीच नीतीश कुमार के इस्तीफे और संभावित सत्ता हस्तांतरण को लेकर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए खेमे में रणनीतिक बैठकों का सिलसिला लगातार जारी है। सुबह से लेकर शाम तक चलने वाली इन बैठकों में नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर हर कदम बेहद अहम माना जा रहा है।
सुबह 11 बजे नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की अंतिम बैठक प्रस्तावित है, जिसे मौजूदा सरकार के अंत का प्रतीक माना जा रहा है। इसके बाद जेडीयू और बीजेपी विधायक दल की अलग-अलग बैठकों में राजनीतिक समीकरणों पर मंथन होगा। दोपहर 3 बजे मुख्यमंत्री राजभवन पहुंचकर इस्तीफा सौंपेंगे, जिसके बाद शाम 4 बजे एनडीए विधायक दल की अहम बैठक में नए मुख्यमंत्री के चेहरे पर अंतिम मुहर लगेगी।इसी निर्णायक बैठक में नेतृत्व चयन की जिम्मेदारी केंद्रीय पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान के हाथों में रहेगी, जो पूरे सियासी गणित को अंतिम रूप देंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि सियासी प्रभाव और संदेशों की लड़ाई भी बन चुका है। जहां एक तरफ सत्ता के नए समीकरण बन रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बयानबाज़ी इस पूरी प्रक्रिया को और भी दिलचस्प और विवादास्पद बना रही है। पटना इस समय सिर्फ प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि सियासी घमासान का ऐसा मंच बन गया है जहां हर बयान, हर बैठक और हर फैसला आने वाले बिहार की राजनीति की दिशा तय कर रहा है।