Tejashwi Yadav: गणतंत्र दिवस पर तेजस्वी का सियासी वार,कहा-संविधान पर प्रहार कर रही है NDA, लोकतंत्र बचाने की दिलाई प्रतिज्ञा
Tejashwi Yadav: बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं, लेकिन उनके संदेश में सिर्फ बधाई नहीं, बल्कि सियासी चेतावनी भी शामिल रही।...
Tejashwi Yadav: पूरा देश आज गणतंत्र दिवस के रंग में रंगा हुआ है। दिल्ली से लेकर राज्यों तक, सत्ता और सियासत के हर मंच पर संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्र की एकता को याद किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश की तमाम प्रमुख हस्तियों ने देशवासियों को 26 जनवरी की मुबारकबाद दी। इसी कड़ी में बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं, लेकिन उनके संदेश में सिर्फ बधाई नहीं, बल्कि सियासी चेतावनी भी शामिल रही।
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा संदेश साझा करते हुए एनडीए सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि गणतंत्र दिवस महान स्वतंत्रता सेनानियों, संविधान निर्माताओं और अमर शहीदों को याद करने का दिन है। यह वही दिन है, जब हम उन कुर्बानियों को सलाम करते हैं, जिनकी बदौलत देश को आज़ादी, एकता और अखंडता मिली।
लेकिन इसके साथ ही तेजस्वी यादव ने मौजूदा एनडीए सरकार की नीतियों को लेकर कड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए की सामाजिक, आर्थिक और संविधान विरोधी अलोकतांत्रिक नीतियों के कारण देश के हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। उनका कहना था कि संविधान लागू होने के दशकों बाद लोकतंत्र को मजबूत करने के बजाय सरकार उसे कमजोर करने में लगी है।
तेजस्वी यादव ने आगे लिखा कि वे फ़ासीवादी ताक़तें, जिनका देश की आज़ादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं रहा, आज संविधान की मूल भावना पर हमला कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान की उद्देशिका तक को बदलने की कोशिशें हो रही हैं, जो देश की लोकतांत्रिक आत्मा के लिए खतरनाक संकेत हैं।
अपने संदेश के अंत में तेजस्वी यादव ने देशवासियों से सामूहिक प्रतिज्ञा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्याग, बलिदान, संघर्ष और समर्पण के रास्ते पर चलकर हमारे पुरखों ने हमें एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भारत सौंपा है। अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखें और अपने सकारात्मक योगदान से संविधान की रक्षा करें।
गणतंत्र दिवस के मौके पर तेजस्वी का यह बयान साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में संविधान और लोकतंत्र सियासी बहस के केंद्र में रहने वाले हैं।