बांकीपुर में रेखा गुप्ता क्यों पड़ीं अकेली? न नामांकन में तेजस्वी, न बड़े नेता... आखिर किस रणनीति पर खेल रहे हैं विपक्ष के नेता? पढ़िए

Bankipur By-Election: चुनावी माहौल के बीच सबसे ज्यादा चर्चा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी की गैरमौजूदगी को लेकर हो रही है। तेजस्वी इन दिनों यूरोप दौरे पर हैं, जबकि बांकीपुर में पार्टी की उम्मीदवार रेखा गुप्ता चुनावी मैदान में संघर्ष करती नजर आ रही हैं।

बांकीपुर में तेजस्वी का रिमोट कैंपेन! - फोटो : Hiresh Kumar

Bankipur By-Election: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल  ने एक बार फिर रेखा गुप्ता पर भरोसा जताया है। पिछली बार चुनाव हारने के बावजूद उन्हें दोबारा उम्मीदवार बनाया गया है। रेखा वैश्य समाज से आती हैं। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने मंत्री बनने के बाद नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर नीरज सिन्हा को मैदान में उतारा है, जबकि जन सुराज की ओर से प्रशांत किशोर चुनाव लड़ रहे हैं। तीन प्रमुख उम्मीदवारों के बीच मुकाबले ने इस सीट को बेहद दिलचस्प बना दिया है।

हालांकि चुनावी माहौल के बीच सबसे ज्यादा चर्चा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी को लेकर हो रही है। तेजस्वी इन दिनों यूरोप दौरे पर हैं, जबकि बांकीपुर में पार्टी की उम्मीदवार चुनावी मैदान में संघर्ष करती नजर आ रही हैं। नामांकन के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए।रेखा गुप्ता जब नामांकन दाखिल करने जिला समाहरणालय पहुंचीं तो उनके साथ पार्टी के कुछ ही नेता मौजूद थे। पूर्व मंत्री आलोक मेहता उनके साथ दिखे, लेकिन राजद के अन्य बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय मौजूदगी नजर नहीं आई। इससे विपक्षी दलों को यह कहने का मौका मिला कि पार्टी का पूरा संगठन अभी तक चुनावी मोड में सक्रिय दिखाई नहीं दे रहा है।

नामांकन से पहले रेखा गुप्ता ने राजद प्रदेश कार्यालय में आयोजित 'आशीर्वाद यात्रा' कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जहां प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल सहित कई नेता मौजूद रहे। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि पिछले चुनाव में भी रेखा गुप्ता उम्मीदवार थीं, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में इस बार कार्यकर्ताओं के बीच शुरुआती उत्साह सीमित दिखाई दे रहा है। वहीं, कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि मतदान की तारीख नजदीक आने के साथ प्रचार अभियान तेज होगा।राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो तेजस्वी यादव ने वैश्य समाज और महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति के तहत रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि इस फैसले पर महागठबंधन के सहयोगी रहे पप्पू यादव ने भी सवाल उठाए और कहा कि क्या वैश्य समाज का वोट परंपरागत रूप से राजद की ओर आएगा। यह बयान राजनीतिक चर्चाओं का विषय बना हुआ है।

जातीय समीकरण भी इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। बांकीपुर में कायस्थ मतदाता सबसे प्रभावशाली समूहों में माने जाते हैं, जिनकी संख्या करीब 18 प्रतिशत बताई जाती है। भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा इसी समुदाय से आते हैं। वहीं प्रशांत किशोर ब्राह्मण समाज से हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सवर्ण वोट भाजपा और जन सुराज के बीच बंटते हैं तो इसका लाभ राजद उम्मीदवार को मिल सकता है। दूसरी ओर राजद को उम्मीद है कि यादव, मुस्लिम और महिला मतदाताओं का समर्थन उसके पक्ष में रहेगा।

हालांकि यह सभी राजनीतिक आकलन हैं और वास्तविक चुनावी नतीजा मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेगा। फिलहाल बांकीपुर का उपचुनाव केवल उम्मीदवारों की नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति, संगठन की सक्रियता और सामाजिक समीकरणों की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। 30 जुलाई को होने वाला मतदान तय करेगा कि किस दल की चुनावी रणनीति मतदाताओं के बीच सबसे अधिक असर छोड़ पाती है।

ब्यूरो रिपोर्ट