पूर्व सीओ की दबंगई! वीडियो बना रही छात्रा पर उठाया हाथ, महिला कॉलेज की जमीन पर कब्जे को लेकर भारी बवाल, पीड़ित ने की कार्रवाई की मांग

पूर्णिया में महिला कॉलेज की जमीन की घेराबंदी के दौरान सीओ और एक छात्रा के बीच हाथापाई का मामला गरमा गया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि वीडियो बनाने पर अधिकारी ने बदसलूकी की, जबकि प्रशासन इसे कार्य में बाधा बता रहा है।

Purnia - : जिले में महिला कॉलेज की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम को स्थानीय लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। विवाद तब और बढ़ गया जब पूर्णिया पूर्व के अंचलाधिकारी (सीओ) संजीव कुमार पर वहां वीडियो बना रही एक छात्रा के साथ बदसलूकी और हाथापाई करने का आरोप लगा। इस घटना का वीडियो अब चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें अधिकारी और स्थानीय महिलाओं के बीच जबरदस्त धक्का-मुक्की देखी जा सकती है।

पीड़ित छात्रा तृषा राय ने आरोप लगाया कि वह केवल घटना का वीडियो बना रही थी, जिससे नाराज होकर सीओ साहब ने उनके साथ मारपीट की और हाथ से मोबाइल छीनने का प्रयास किया। छात्रा का कहना है कि एक लोक सेवक होने के नाते अधिकारी को जनता की बात सुननी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया। विवाद इतना बढ़ा कि बाद में अधिकारी ने खुद को बचाने के लिए महिला पुलिसकर्मियों को आगे कर दिया।

दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का दावा है कि जिस जमीन की घेराबंदी प्रशासन द्वारा जबरन की जा रही है, वह उच्च न्यायालय के आदेशानुसार रैयतों को रास्ते के तौर पर आवंटित की गई है। लोगों का आरोप है कि न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी कर प्रशासन कॉलेज के पक्ष में घेराबंदी करवा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में जुटे ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और 'स्टीयरिंग रोको' जैसे आंदोलनों की चेतावनी भी दी।

अंचलाधिकारी संजीव कुमार ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने मीडिया को बताया कि वे केवल जिला प्रशासन के आदेश पर पुलिस बल की मौजूदगी में सरकारी जमीन की घेराबंदी सुनिश्चित करा रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर कार्य में बाधा डाल रहे थे और अभद्र टिप्पणी कर रहे थे। अधिकारी के अनुसार, उन्होंने किसी भी प्रकार की हाथापाई नहीं की है और उन्हें अपनी सीमाओं का पूरा ज्ञान है।

इस पूरी घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और पीड़ित छात्रा ने अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने और उन्हें सस्पेंड करने की मांग की है। पुलिस विभाग अब वायरल वीडियो और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर मामले की जांच कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी सरकारी कार्य में बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

रिपोर्ट - अंकित कुमार झा।