वन विभाग और WCCB की बड़ी कार्रवाई : वन्यजीव अंगों की तस्करी करने वाले गिरोह खुलासा, तीन तस्कर गिरफ्तार

सासाराम के कैमूर पहाड़ी जंगल क्षेत्र से हो रहे जंगली पशुओँ के अंगो की तस्करी करने वाले गिरोह का वन विभाग और वन्य अपराध नियंत्रण ब्यूरो की टीम ने खुलासा किया है। दोनो ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है.....

तीन वन्यजीव अंग तस्कर गिरफ्तार- फोटो : रंजन कुमार

Sasaram : रोहतास वन प्रमंडल तथा वन्य अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) कोलकाता की संयुक्त टीम ने सासाराम के कैमूर पहाड़ी के जंगल क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जंगली पशुओं के अंगों की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। अधिकारियों ने एक सुनियोजित ट्रैप का सहारा लेते हुए प्रतिबंधित पैंगोलिन के शल्क (स्किन) के साथ तीन शातिर तस्करों को धर दबोचा है।


पकड़े गए तस्करों की पहचान और उनका विवरण

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सुनील सिंह शामिल है, जो नोखा के गोसाईपुर का रहने वाला है, जबकि दूसरा आरोपी संजय कुमार बक्सर जिले के रामपुर का निवासी है। इसके साथ ही, कैमूर जिले के बेलाव क्षेत्र के रहने वाले विमल पासवान को भी इस अवैध कारोबार में संलिप्तता के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। ये सभी मिलकर प्रतिबंधित जीव-जंतुओं के अंगों की अवैध तस्करी को अंजाम दे रहे थे।


डीएफओ स्टालिन फिटल कुमार का बयान और अंधविश्वास पर प्रहार

रोहतास जिला वन प्रमंडल के डीएफओ स्टालिन फिटल कुमार ने इस मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पैंगोलिन के स्किन का व्यावहारिक रूप से चिकित्सा या अन्य क्षेत्रों में कोई उपयोग नहीं है। इसके बावजूद समाज में फैले अंधविश्वास और गलत मान्यताओं के कारण लोग अवैध रूप से इसकी तस्करी करते हैं, जिससे वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है।


वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की तैयारी

वन विभाग और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की इस संयुक्त कार्रवाई से तस्करों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के सुसंगत प्रावधानों के तहत इन सभी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


गिरोह के अन्य नेटवर्क और संपर्कों को खंगाल रही टीम

जांच एजेंसियों का मुख्य उद्देश्य इस अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह के पूरे नेटवर्क को बेनकाब करना है। वन विभाग की टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पैंगोलिन के इन अंगों को कहां आपूर्ति किया जाना था और इस अवैध सिंडिकेट के तार किन अन्य जिलों या राज्यों से जुड़े हुए हैं।

रंजन की रिपोर्ट