बाल देख-रेख संस्थानों का डीएम ने किया निरीक्षण, अवैध गोद देने की प्रथा पर दी सख्त चेतावनी

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिलास्तरीय निरीक्षण समिति ने समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न बाल देख-रेख संस्थानों का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान डीएम ने बच्चों के आवासन, भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया.

बाल देख-रेख संस्थानों का डीएम ने किया निरीक्षण- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में गठित जिलास्तरीय निरीक्षण समिति ने समाज कल्याण विभाग (जिला बाल संरक्षण इकाई) द्वारा संचालित विभिन्न बाल देख-रेख संस्थानों का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण की शुरुआत सुखपुर स्थित पर्यवेक्षण गृह से हुई, जहां डीएम ने बच्चों के आवासन, भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया तथा अधिकारियों को बच्चों को सुरक्षित व अनुकूल वातावरण देने के सख्त निर्देश दिए।


अवैध रूप से बच्चा गोद देने पर होगी कड़ी कार्रवाई 

पिपरा रोड स्थित विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान का जायजा लेते हुए जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले के सभी सरकारी व निजी चिकित्सा संस्थानों को सूचित किया जाए कि किसी भी परित्यक्त या बेसहारा बच्चे को केवल अधिकृत संस्थान के माध्यम से ही कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद दिया जा सकता है। किसी भी अस्पताल द्वारा अवैध रूप से बच्चा सौंपना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है, जिसमें किसी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।



60 बच्चों के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं पर जताई संतुष्टि 

चैनसिंहपट्टी स्थित वृहद आश्रय गृह का निरीक्षण करते हुए डीएम ने वहां आवासित 60 बच्चों से सीधा संवाद किया और उन्हें मिलने वाली सरकारी सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने परिसर की स्वच्छता और बच्चों के लिए की गई आवासन व्यवस्था की सराहना करते हुए कर्मियों को बेहतर सेवा देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत बरामद बच्चों को परिवार मिलने तक सुरक्षित रखना संस्थान की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है।


परिजनों की खोज और पुनर्वासन प्रक्रिया में तेजी के निर्देश 

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन बच्चों के माता-पिता या परिवारों की पहचान हो चुकी है, उनकी त्वरित काउंसलिंग कराकर कागजी प्रक्रिया पूरी की जाए। दूसरे जिलों से आए बच्चों के मामलों में संबंधित बाल कल्याण समिति (CWC) से बेहतर समन्वय स्थापित कर बच्चों को उनके मूल परिवारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आदेश दिया गया।


कौशल विकास से आत्मनिर्भर बनेंगे बच्चे 

डीएम सावन कुमार ने संस्थानों में रह रहे बच्चों को सामान्य शिक्षा के साथ-साथ उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) का प्रशिक्षण देने पर विशेष जोर दिया, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। इस निरीक्षण अभियान के दौरान सहायक निदेशक (बाल संरक्षण), सिविल सर्जन, डीपीओ (सर्वशिक्षा अभियान), डीएसपी साइबर, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्य तथा रेड क्रॉस के प्रतिनिधि मौजूद रहे।


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट