सुपौल में कोसी पीड़ितों का एक दिवसीय 'जल सत्याग्रह', प्रशासन के समक्ष रखी 8 सूत्री मांगें

सुपौल जिले के कोसी तटबंध के भीतर लंबे समय से जारी बाढ़ और गंभीर जलजमाव की समस्या को लेकर मंगलवार को कोसी पीड़ितों ने अपनी आवाज बुलंद की। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ने छाती तक पानी में खड़े होकर अपनी पीड़ा जाहिर की.....

कोसी पीड़ितों का एक दिवसीय 'जल सत्याग्रह- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जिले के कोसी तटबंध के भीतर लंबे समय से जारी बाढ़ और गंभीर जलजमाव की समस्या को लेकर मंगलवार को कोसी पीड़ितों ने अपनी आवाज बुलंद की। कोसी नव निर्माण मंच के आह्वान पर मरौना अंचल स्थित एकडेरा पलार घाट पर एक दिवसीय 'जल सत्याग्रह' का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शन में मरौना और किशनपुर अंचल के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने छाती तक पानी में खड़े होकर अपनी पीड़ा जाहिर की और जिला प्रशासन से क्षेत्र को अविलंब बाढ़ प्रभावित घोषित कर राहत एवं पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की।


घर-आंगन जलमग्नफसलें बर्बाद और नाव ही बनी एकमात्र सहारा 

इस सत्याग्रह में मरौना अंचल की सिसौनी पंचायत (एकडेरा, जोबहां, सिसौनी पलार) और किशनपुर अंचल की बैराहा व नोआबाखर पंचायतों (बौराहा, गोढ़ियारी, मानिकपुर, बुर्जा मुसहरी, परसाही, सिमराहा आदि) से पीड़ित ग्रामीण पहुंचे। ग्रामीणों ने बताया कि मानसून की शुरुआत से ही तटबंध के भीतर स्थित गांवों में पानी जमा है। घर, आंगन, रास्ते और खेत जलमग्न हैं और एक घर से दूसरे घर जाने के लिए भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। लंबे समय से जलजमाव के कारण महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों व मरीजों को भारी दिक्कत हो रही है तथा फसलें सड़ने के साथ मवेशी भी बीमार पड़ रहे हैं।


आपदा प्रबंधन विभाग के नियमों का दिया हवाला 

सत्याग्रह के दौरान ग्रामीणों ने बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी टोले या गांव के चारों ओर चार-पांच दिनों तक नदी का पानी जमा रहे और आवागमन बाधित हो, तो उसे जनजीवन प्रभावित मानकर राहत दी जानी चाहिए। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित घोषित न किए जाने पर ग्रामीणों ने रोष जताया। उन्होंने मांग की कि प्रशासनिक अधिकारी कागजी कार्रवाई छोड़कर तटबंध के भीतर आकर जमीनी स्थिति का जायजा लें।


प्रशासन के समक्ष रखी गई सूत्री मांगें 

प्रदर्शनकारियों ने अपनी आठ सूत्री मांगों को प्रमुखता से रेखांकित किया। इसमें क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर बाढ़ प्रभावित घोषित कर मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत जीआर (GR) की राशि का भुगतान करने, फसल क्षति का इनपुट अनुदान देने, विस्थापित व भूमिहीन परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने, तटबंध के भीतर निःशुल्क मेडिकल व पशु चिकित्सा शिविर लगाने, 'कोसी पीड़ित विकास प्राधिकार' को पुनर्जीवित करने तथा कोसी की छाड़न धाराओं का पुनरुद्धार कर समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग शामिल है।


सैकड़ों ग्रामीणों की रही मौजूदगी 

इस जल सत्याग्रह में सुभाष यादव, जय कुमार, शिवनारायण मंडल, राम कुमार राय, शिवशंकर मंडल, आलोक राय, भूषण कुमार, मूंगा लाल मंडल, रीना देवी, रीता देवी, सरस्वती देवी, जटायु मुखिया, श्रवण मंडल, धनेश्वर सदा, विद्यानंद सदा सहित मरौना व किशनपुर के सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी वाजिब मांगों पर त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अपनी लड़ाई को आगे भी जारी रखेंगे।


विनय कुमार मिश्रा की रिपोर्ट