बाल अधिकारों की रक्षा के लिए 'सुरक्षित बचपन अभियान' की शुरुआत: विद्यालयों में आयोजित किए गए विधिक जागरूकता कार्यक्रम

बाल अधिकारों की रक्षा के लिए 'सुरक्षित बचपन अभियान' की शुरुआत- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : बच्चों के अधिकारों की रक्षा, उन्हें शोषण एवं उत्पीड़न से सुरक्षित रखने और भयमुक्त वातावरण प्रदान करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की परिकल्पना के तहत सोमवार को सुपौल जिले में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का विधिवत शुभारंभ किया गया। अभियान के पहले दिन जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के तत्वावधान में जिले के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों के विद्यालयों में व्यापक स्तर पर विधिक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष राजेश कुमार बच्चन के मार्गदर्शन में छात्रों को उनके कानूनी अधिकारों और बाल संरक्षण कानूनों की जानकारी दी गई।


विभिन्न प्रखंडों के 15 से अधिक विद्यालयों में गूंजा बाल सुरक्षा का संदेश

इस अभियान के प्रथम दिन सुपौल, किशनपुर, पिपरा, सरायगढ़-भपटियाही और त्रिवेणीगंज प्रखंडों के कुल 15 विद्यालयों के साथ-साथ वीरपुर स्थित सावित्री प्रभा आवासीय विद्यालय में भी जागरूकता सत्र आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में प्राधिकार के पैनल अधिवक्ताओं और पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLVs) ने सक्रिय रूप से भाग लिया। सुखपुर-सोलहनी, राजपुर, पथरा, शाहपुर पृथ्वीपट्टी, थलहा गढ़िया दक्षिण और कोरियापट्टी सहित विभिन्न पंचायतों के विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को बाल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों से अवगत कराया गया।


'गुड टच-बैड टच' और पॉक्सो एक्ट की दी गई जानकारी

जागरूकता सत्रों के दौरान विशेषज्ञों ने बच्चों को उनके मूलभूत अधिकारों, बाल यौन शोषण से बचाव, 'सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श' (Safe and Unsafe Touch) की पहचान तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) के विभिन्न प्रावधानों के बारे में विस्तार से समझाया। इसके अलावा, बच्चों को डिजिटल युग की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन सुरक्षा, सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल और साइबर अपराधों से बचाव के उपाय भी बताए गए। बच्चों को यह खास तौर पर समझाया गया कि किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या अनुचित व्यवहार की स्थिति में वे डरे नहीं, बल्कि तुरंत अपने शिक्षक, माता-पिता या संबंधित प्राधिकरण को इसकी जानकारी दें।


विभिन्न विभागों और संगठनों के समन्वय से चल रहा अभियान

इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने विभिन्न सरकारी विभागों के साथ-साथ गैर-सरकारी संगठन समग्र शिक्षण एवं विकास संस्थान (SSEVS) के साथ मिलकर समन्वय स्थापित किया है। कार्यक्रमों में न्यायिक पदाधिकारियों, बाल कल्याण समिति (CWC), जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU), पैनल अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। प्राधिकार के अध्यक्ष राजेश कुमार बच्चन ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा किसी एक विभाग की नहीं बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है, और "सुरक्षित बचपन ही सशक्त समाज की नींव है"।


31 अक्टूबर तक चलेगा जागरूकता का यह विशेष अभियान

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 'सुरक्षित बचपन अभियान' का यह प्रथम चरण आगामी 31 अक्टूबर 2026 तक सुपौल जिले के विभिन्न विद्यालयों में संचालित किया जाएगा। अभियान के अगले चरण में विद्यालयों के नामित शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिए जाने की योजना है, ताकि बाल अधिकारों से जुड़ी ये जागरूकता गतिविधियां निरंतर जारी रह सकें और बाल संरक्षण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट