Income tax returns: Form 16 से पहले ITR भरना सही या गलत? जानें जरूरी नियम, टैक्स फाइल करने वालों के लिए अहम जानकारी

Income tax returns: इस बार आयकर रिटर्न भरने के नियमों में बदलाव किए गए हैं। अब दो मकानों की आय, बैंक बैलेंस और वसूल न हो सकने वाले किराए की जानकारी देना जरूरी।

आयकर रिटर्न भरने से पहले जरूरी दस्तावेजों की जांच करें- फोटो : freepik

Income tax returns: आयकर रिटर्न भरने की प्रक्रिया हर साल की तरह इस बार भी शुरू हो चुकी है। आयकर विभाग ने आईटीआर-1 और आईटीआर-4 के लिए एक्सेल यूटिलिटी जारी कर दी है। इससे कई टैक्सपेयर्स अब फॉर्म-16 मिलने से पहले भी अपना रिटर्न भरना शुरू कर सकते हैं। आमतौर पर फॉर्म-16 जून के मध्य तक जारी होता है। इस बार आयकर रिटर्न दाखिल करने के नियमों में कई अहम बदलाव किए गए हैं। पहली नजर में प्रक्रिया पहले जैसी लग सकती है, लेकिन फॉर्म और रिपोर्टिंग नियमों में बदलाव होने से टैक्सपेयर्स को पहले से ज्यादा सावधानी बरतनी होगी।

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रिटर्न पुराने आयकर कानून यानी आयकर अधिनियम 1961 के तहत ही भरा जाएगा। हालांकि नया आयकर अधिनियम 2025 लागू हो चुका है, लेकिन यह पुराने कानून के तहत रिटर्न दाखिल करने का आखिरी दौर होगा।

अब दो मकानों की आय भी दिखा सकेंगे

इस साल सबसे बड़ी राहत उन लोगों को मिली है जिनके पास दो घर हैं। पहले आईटीआर-1 और आईटीआर-4 फॉर्म में मकान से होने वाली आय दिखाने के सीमित विकल्प थे। अब वेतनभोगी कर्मचारी और छोटे कारोबारी इन आसान फॉर्मों का इस्तेमाल करते हुए दो आवासीय संपत्तियों से होने वाली आय की जानकारी भी दे सकेंगे। इससे ऐसे लोगों को जटिल फॉर्म भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

किराया न मिलने पर भी देनी होगी जानकारी

आयकर विभाग ने इस बार एक नया खुलासा नियम भी जोड़ा है। अब आईटीआर-1 और आईटीआर-4 फॉर्म में “वसूल न हो सकने वाले किराए” के लिए अलग सेक्शन दिया गया है। पहले इन फॉर्मों में ऐसी जानकारी देने की अलग सुविधा नहीं थी। अब मकान मालिकों को यह बताना होगा कि कितना किराया उन्हें नहीं मिल पाया। सरकार का उद्देश्य किराये से होने वाली आय की जानकारी को ज्यादा साफ और पारदर्शी बनाना है।

बैंक बैलेंस बताना भी जरूरी

जो लोग Presumptive Taxation Scheme के तहत आईटीआर-4 भरते हैं, उनके लिए इस बार एक और जरूरी बदलाव किया गया है।धारा 44AD, 44ADA और 44AE के तहत आने वाले टैक्सपेयर्स को अब 31 मार्च 2026 तक अपने सभी सक्रिय बैंक खातों का कुल क्लोजिंग बैलेंस बताना होगा।यह जानकारी आईटीआर-4 के E21 सेक्शन में देनी जरूरी होगी।टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देता है या बैंक बैलेंस छिपाता है, तो उसे इनकम टैक्स विभाग की तरफ से नोटिस या जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

टैक्सपेयर्स को क्या ध्यान रखना चाहिए?

इस बार रिटर्न भरते समय टैक्सपेयर्स को अपनी आय, बैंक खाते, मकान से होने वाली कमाई और बाकी वित्तीय जानकारी सही तरीके से दर्ज करनी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि रिटर्न भरने से पहले सभी दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच कर लेना जरूरी है, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।