Bihar Crime:नक्सलियों का खौफनाक फरमान, जमीन कारोबारी को मौत की धमकी से मचा हड़कंप

Bihar Crime: गया टिकारी थाना क्षेत्र के मरदुआ गांव में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब जमीन कारोबारी अजय यादव के खिलाफ प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के नाम से मौत का फरमान जारी किए जाने का मामला सामने आया।..

नक्सलियों का खौफनाक फरमान- फोटो : reporter

Bihar Crime: गया टिकारी थाना क्षेत्र के मरदुआ गांव में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब जमीन कारोबारी अजय यादव के खिलाफ प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के नाम से मौत का फरमान जारी किए जाने का मामला सामने आया। नक्सलियों ने कथित तौर पर पोस्टर चिपकाकर अजय यादव पर जमींदारी की परती जमीन बेचने का इल्जाम लगाया है। पोस्टर में अजय यादव के साथ उनके सहयोगी और रिश्तेदार वीरेंद्र यादव को भी सजा सुनाए जाने की बात कही गई है। घटना के बाद इलाके में खौफ और दहशत का माहौल है।

बताया जा रहा है कि नक्सली पोस्टर अजय यादव के पैतृक घर से करीब 15 किलोमीटर दूर औरंगाबाद जिले के गोह थाना क्षेत्र में दुल्हा बिगहा नहर के पास पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के समीप चिपकाए गए हैं। पोस्टर सामने आने के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। पोस्टर में माओवादियों की ओर से अजय यादव पर जमींदारी की परती जमीन की खरीद-बिक्री करने का आरोप लगाया गया है। कथित तौर पर यह फरमान माओवादी नेता रोहित जी के नाम से जारी किया गया है।

नक्सली फरमान की खबर मिलते ही अजय यादव के होश उड़ गए। उन्होंने घटना की जानकारी पुलिस को दी और थाना पहुंचकर अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई। अजय यादव ने पुलिस प्रशासन के वरीय अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ाने और जरूरी सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है। मौत की धमकी मिलने के बाद उनका परिवार भी खौफ के साये में है।

अजय यादव का कहना है कि वह कोई बड़ा जमीन कारोबारी नहीं हैं। उनके मुताबिक वह छोटी-मोटी जमीन की खरीद-बिक्री का काम करते हैं। ऐसे में नक्सलियों की ओर से मौत की सजा का फरमान जारी किए जाने से पूरा परिवार सदमे में है। परिवार के लोगों को किसी अनहोनी की आशंका सता रही है।

इधर छटमा पंचायत के मुखिया जोगेंद्र कुमार यादव ने भी घटना पर चिंता जताई है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और गंभीरता से तफ्तीश कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।फिलहाल पोस्टर वास्तव में नक्सलियों ने ही चिपकाए हैं या इसके पीछे किसी अन्य साजिश का हाथ है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टर में लगाए गए आरोपों की सच्चाई भी पुलिस जांच के बाद ही साफ हो सकेगी। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है और पोस्टर लगाने वालों की पहचान समेत पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है।

रिपोर्ट - मनोज कुमार