Chandan murder case:चंदन मर्डर केस में बड़ा खुलासा, जेल से रची गई कत्ल की साज़िश, वर्चस्व की लड़ाई में शेरू ने जेल से मिलाया तीन गिरोह, बक्सर के डॉन को इस सख्स ने मरवाया

Chandan murder case: पटना के पारस अस्पताल की दीवारें 17 जुलाई को सिर्फ़ एक इंसान की मौत की गवाह नहीं बनीं, बल्कि अपराध की दुनिया के एक क्रूर अध्याय का खुलासा भी वहीं हुआ।

चंदन मर्डर केस में बड़ा खुलासा- फोटो : reporter

Chandan murder case: पटना के पारस अस्पताल की दीवारें 17 जुलाई को सिर्फ़ एक इंसान की मौत की गवाह नहीं बनीं, बल्कि अपराध की दुनिया के एक क्रूर अध्याय का खुलासा भी वहीं हुआ। यह कोई अचानक हुई हत्या नहीं थी यह थी एक सुनियोजित साज़िश, जिसे पश्चिम बंगाल की जेल में बैठे कुख्यात अपराधी शेरू ने रचा था। उसका मकसद साफ था बक्सर में अपना एकछत्र राज कायम करना। और इसके रास्ते में सबसे बड़ी दीवार था सजायाफ्ता गैंगस्टर चंदन मिश्रा।

चंदन का बक्सर में वर्चस्व, उसका बढ़ता नेटवर्क और दबदबा शेरू की आंख की किरकिरी बन चुका था। अपराध की दुनिया में यह टकराव सिर्फ़ दुश्मनी नहीं, बल्कि सत्ता और सिंघासन की लड़ाई थी। इस लड़ाई में शेरू ने तीन गैंगों को साथ मिलाया—शूटर, हथियार सप्लायर और चोरी के वाहन का जुगाड़ करने वाले। ये सभी किरदार इस कत्ल की पटकथा में अपने-अपने हिस्से की भूमिका पहले ही तय कर चुके थे।

जैसे ही शेरू को सूचना मिली कि चंदन जेल से बाहर है और पारस में इलाजरत, उसने अपने प्लान को अंजाम देना शुरू कर दिया। गिरोह के लोग लगातार चंदन पर नज़र रखे हुए थे, और जैसे ही मौका मिला, हॉस्पिटल को बना दिया कत्लगाह। बंदूकें तनीं, गोलियां चलीं और बक्सर का डॉन ढेर हो गया उस बिस्तर पर, जहां जिंदगी की उम्मीद में वो लेटा था।

पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि इस साज़िश को अंजाम देने के लिए शूटर तौसीफ उर्फ बादशाह, उसका मौसेरा भाई और चार अन्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। एसटीएफ और बक्सर पुलिस की टीम ने भोजपुर के बिहिया में मुठभेड़ के बाद बलवंत सिंह, रविरंजन और अभिषेक को भी धर दबोचा। लेकिन असली मास्टरमाइंड शेरू अब भी जेल में बैठा अपने अगले शिकार की स्क्रिप्ट लिख रहा हो सकता है।

इस वारदात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जेल में बैठकर कैसे रची जाती है हत्या की योजना?कौन हैं वो लोग जो अपराधियों को हथियार, वाहन और ठिकाना मुहैया कराते हैं और सबसे बड़ा सवाल क्या अस्पताल जैसी सुरक्षित जगह भी अब सिस्टम की विफलता की शिकार बन चुकी है? बहरहाल यह मर्डर नहीं, एक मैसेज था अपराध की दुनिया में जगह के लिए अब तलवार नहीं, ट्रिगर चलता है। और जब सत्ता की लालसा होती है, तो मौत को हॉस्पिटल तक घसीट लाया जाता है।

रिपोर्ट- कुलदीप भारद्वाज