Bihar Crime: बिहार में कानून के रखवाले ही बने जालिम! उत्पाद विभाग की टीम पर मारपीट का इल्ज़ाम, बच्चों पर लाठीचार्ज से गांव में दहशत

Bihar Crime:नशाबंदी लागू कराने वाले उत्पाद विभाग की टीम पर ही कानून को ताक पर रखने का संगीन इल्ज़ाम लगा है।

बिहार में कानून के रखवाले ही बने जालिम! - फोटो : reporter

Bihar Crime: समस्तीपुर जिले के उजियारपुर थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां नशाबंदी लागू कराने वाले उत्पाद विभाग की टीम पर ही कानून को ताक पर रखने का संगीन इल्ज़ाम लगा है। भगवानपुर कमला पंचायत के सैदपुर जाहिद गांव, वार्ड संख्या–03 में बुधवार की शाम करीब सात बजे अचानक हालात उस वक्त बेकाबू हो गए, जब उत्पाद विभाग की टीम छापेमारी के इरादे से गांव में दाखिल हुई।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, टीम ने दबिश के दौरान कई ग्रामीणों को हिरासत में लिया। इसी बीच एक युवक कथित तौर पर मौके से भागने की कोशिश कर रहा था, जिसे टीम ने पकड़ लिया। आरोप है कि पकड़े गए शख्स को वहीं सरेआम पीटा गया और उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। चीख-पुकार सुनकर घरों से बच्चे और महिलाएं बाहर निकल आए और कार्रवाई का विरोध करने लगे।

ग्रामीणों का दावा है कि हालात बिगड़ते देख उत्पाद विभाग की टीम ने बच्चों तक पर लाठियां भांज दीं, जिससे गांव में अफरा-तफरी और खौफ का माहौल कायम हो गया। आरोप यह भी है कि स्थिति हाथ से निकलती देख टीम जल्दबाजी में मौके से निकल गई। हालांकि, उत्पाद विभाग का कहना है कि कार्रवाई के दौरान चार लोगों को नशे की हालत में पकड़ा गया है, जिन्हें समस्तीपुर ले जाया गया है।

घटना के बाद पूरे गांव में तनाव और नाराज़गी का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि नशाबंदी के नाम पर निर्दोष लोगों के साथ ज्यादती की गई है। लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है, ताकि सच सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो।

मामले की सूचना मिलते ही उजियारपुर थाना की पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों से बातचीत कर हालात का जायजा लिया। प्रशासन का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और सवाल उठ रहे हैं कि कानून लागू कराने वाले अगर खुद ही कानून के दायरे से बाहर निकल जाएं, तो आम लोगों को इंसाफ कैसे मिलेगा।

रिपोर्ट- सोनू सहनी