सावन में बिहार के इन 5 प्रसिद्ध शिव मंदिरों के जरूर करें दर्शन, भोलेनाथ बरसाएंगे कृपा
सावन के पूरे महीने इन मंदिरों में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों का सिलसिला चलता है। इसमें बिहार के पांच ऐसे शिव मंदिर के बारे में जानिए जहाँ जरुर पूजा करनी चाहिए.
Sawan : सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान बिहार के प्रमुख शिव मंदिरों में लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। विशेषकर बिहार के 5 शिव मंदिरों को लेकर श्रद्धालुओ की भारी भीड़ उमड़ती है।
बाबा अजगैबीनाथ मंदिर, सुल्तानगंज (भागलपुर)
सुल्तानगंज स्थित बाबा अजगैबीनाथ मंदिर सावन में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। यहीं से कांवरिए गंगाजल भरकर देवघर के लिए अपनी यात्रा शुरू करते हैं। मान्यता है कि यहां भगवान शिव ने स्वयं विराजमान होकर इस स्थान को पवित्र बनाया था। सावन में यहां लाखों श्रद्धालु जुटते हैं।
अशोक धाम मंदिर, लखीसराय
लखीसराय जिले का अशोक धाम बिहार के सबसे प्रसिद्ध शिवधामों में से एक है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और सावन के महीने में यहां लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी है। सावन के प्रत्येक सोमवार और शिवरात्रि पर यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है। सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बड़ी संख्या में कांवरिए अशोक धाम पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए हर वर्ष प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा और सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है।
उमानाथ महादेव मंदिर, बाढ़ (पटना)
गंगा तट पर स्थित उमानाथ महादेव मंदिर बिहार के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में गिना जाता है। सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है।
गरीबनाथ मंदिर, मुजफ्फरपुर
बाबा गरीबनाथ धाम उत्तर बिहार का प्रसिद्ध शिव मंदिर है। इसे "उत्तर बिहार का देवघर" भी कहा जाता है। सावन में लाखों श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु सोनपुर के पहलेजा घाट या अन्य गंगा घाटों से जल लाकर बाबा गरीबनाथ का अभिषेक करते हैं।
सिंहेश्वरनाथ मंदिर, मधेपुरा
मधेपुरा का सिंहेश्वरनाथ मंदिर भी प्राचीन शिव मंदिरों में शामिल है। धार्मिक मान्यता है कि यह मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां हजारों श्रद्धालु जल चढ़ाने और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
सावन के पूरे महीने इन मंदिरों में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों का सिलसिला चलता है। प्रशासन भी श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम करता है।