सावन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का साया,जानें कब है राखी और स्नान-दान का शुभ समय
Chandra Grahan 2026: सावन पूर्णिमा के दिन भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन यानी राखी का त्योहार भी मनाया जाता है। लेकिन इस बार चंद्र ग्रहण का संयोग बनने से लोगों के बीच तिथि को लेकर असमंजस पैदा हो गया है।...
Chandra Grahan 2026: हिंदू धर्म में सावन पूर्णिमा का पर्व बेहद पावन और खास माना जाता है। सावन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर भगवान शिव की आराधना, शिवलिंग का जलाभिषेक, स्नान-दान और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है। इसी दिन भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन यानी राखी का त्योहार भी मनाया जाता है। लेकिन इस बार सावन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का संयोग बनने से लोगों के बीच तिथि और धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर असमंजस पैदा हो गया है।
हालांकि, ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भारत में यह चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा। ऐसे में ग्रहण की दृश्यता नहीं होने के कारण भारत में इसका सूतक काल और ग्रहण संबंधी धार्मिक प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। यानी सावन पूर्णिमा के दिन स्नान-दान, पूजा-पाठ और राखी बांधने जैसे धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।
हिंदू पंचांग के मुताबिक सावन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 09 मिनट से शुरू होगी। पूर्णिमा तिथि का समापन 28 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 47 मिनट पर होगा।उदया तिथि के नियम के अनुसार सावन पूर्णिमा का पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इसी दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधेंगी और उनकी लंबी उम्र तथा सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।सावन पूर्णिमा पर पवित्र नदियों या तीर्थस्थलों में स्नान और जरूरतमंदों को दान करने की भी विशेष परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ किया गया स्नान-दान पुण्य फल प्रदान करता है।
इस बार सावन के महीने में चंद्र ग्रहण का संयोग करीब 18 साल बाद बन रहा है। भारतीय समय के अनुसार चंद्र ग्रहण सुबह 28 अगस्त को 6 बजकर 53 मिनट पर शुरू होगा और दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। ग्रहण दिन के समय होगा और उस वक्त भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा। यही वजह है कि भारत के लोग इस खगोलीय घटना को अपनी आंखों से नहीं देख सकेंगे।यह ग्रहण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा।
चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसलिए पूर्णिमा के दिन मंदिरों में पूजा-पाठ, भगवान शिव का जलाभिषेक, स्नान-दान और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों को रोकने की जरूरत नहीं होगी।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान शुभ कार्यों पर रोक लगाई जाती है, लेकिन जब ग्रहण किसी स्थान से दिखाई ही न दे तो वहां सामान्य धार्मिक गतिविधियों पर इसका असर नहीं माना जाता।
इस साल रक्षा बंधन को लेकर भी श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात बताई जा रही है। राखी के दिन भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी, इसलिए दिन में भद्रा का साया नहीं रहेगा।हालांकि राखी बांधने के लिए राहुकाल से बचने की सलाह दी जाती है। बहनें शुभ समय देखकर भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।यानी सावन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का खगोलीय संयोग जरूर बन रहा है, लेकिन भारत में ग्रहण नजर नहीं आने के कारण श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक अनुष्ठानों में कोई बड़ी रुकावट नहीं होगी। भगवान शिव की पूजा, स्नान-दान और रक्षा बंधन का पर्व अपनी परंपरा के अनुसार मनाया जा सकेगा।