बिहार में 4 हजार सरप्लस शिक्षकों पर तबादले की तलवार, शहरी स्कूलों से हटाकर गांवों में भेजने की तैयारी, कहीं आपका नाम भी तो नहीं....

Bihar Education Department: बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है।...

सरप्लस शिक्षकों पर तबादले की तलवार- फोटो : social Media

Bihar Education Department: बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। राज्य के लगभग हर जिले के शहरी क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा तैनात करीब 4 हजार शिक्षकों को अब ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों में भेजा जाएगा। शिक्षा विभाग ने इसके लिए नए मानक तय कर दिए हैं और इसी आधार पर सरप्लस शिक्षकों की पहचान की जा रही है।

सबसे ज्यादा सरप्लस शिक्षक हिंदी, समाजशास्त्र, इतिहास और कला विषयों के बताए जा रहे हैं। वहीं गणित, विज्ञान और कॉमर्स जैसे विषयों के शिक्षकों की कमी अभी भी गंभीर समस्या बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार राज्य के 20 हजार से अधिक स्कूलों में गणित के शिक्षक नहीं हैं, जिसके कारण कई जगह अंग्रेजी या समाजशास्त्र के शिक्षक गणित पढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

विज्ञान विषयों में भी भौतिकी और रसायन विज्ञान के शिक्षकों की कमी बनी हुई है। हालांकि जीवविज्ञान विषय में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है। बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षा संघ के सचिव आनंद मिश्रा ने कहा कि विषयवार और क्षेत्रवार शिक्षकों का संतुलित समायोजन शिक्षा विभाग के लिए सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी।

विभाग के अनुसार, अब स्कूलों में छात्र संख्या के अनुपात में शिक्षकों की नियुक्ति होगी। नए मानक के तहत 60 छात्रों पर दो शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा ऐसे शिक्षक भी सरप्लस की श्रेणी में आएंगे, जो एक ही विद्यालय में लगातार पांच वर्षों से अधिक समय से कार्यरत हैं। विभाग का मानना है कि कई शहरी स्कूलों में छात्रों की संख्या की तुलना में शिक्षकों की संख्या काफी अधिक हो गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है।पटना, बेगूसराय, भागलपुर, गया, मुजफ्फरपुर और वैशाली समेत कई जिलों के स्कूलों में शिक्षकों की संख्या जरूरत से ज्यादा पाई गई है। इन शिक्षकों का समायोजन शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। विभाग अब संतुलित तरीके से शिक्षकों को उन विद्यालयों में भेजने की तैयारी कर रहा है, जहां विषयवार शिक्षकों की कमी है।

वहीं, शिक्षकों की संख्या के नए मानक को लेकर शुरुआती शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। विभाग के अनुसार यदि किसी प्राथमिक विद्यालय में 60 छात्र हैं तो कक्षा एक से पांच तक की जिम्मेदारी दो शिक्षक संभालेंगे। इससे मल्टीग्रेड शिक्षण की स्थिति पैदा हो सकती है, जहां एक ही शिक्षक को एक साथ कई कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाना पड़ेगा।

शिक्षाविदों का कहना है कि प्राथमिक विद्यालयों में प्रधान शिक्षक समेत कम से कम पांच शिक्षकों की जरूरत होती है। भवनों और संसाधनों की कमी के बीच कम शिक्षकों से कई कक्षाओं को संभालना बच्चों की सीखने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में मानक के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। जिन विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या अधिक है, वहां से शिक्षकों को जरूरत वाले स्कूलों में भेजा जाएगा, ताकि हर विषय के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हो सकें।