CM नीतीश ही नहीं पलटीमार नेताओं की बड़ी फौज है बिहार में, मांझी हों या सम्राट- उपेंद्र हों या नागमणि सब हैं पलटबाज, रामविलास सबके सरदार
पटना। पिछले कुछ वर्षों में बिहार की रियासत की जब भी चर्चा होती है तो यहां नेताओं के एक दल से दूसरे दल में जाने या फिर एक गठबंधन से दूसरे गठबंधन में जाकर सरकार बनाने के लिए ही राज्य बदनाम होता है। एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुनः एनडीए में शामिल होने की चर्चा जोरों पर है। संभावित है कि रविवार शाम वे भाजपा के समर्थन से बिहार में नई सरकार बनाने का दावा पेश करें। ऐसे में नौवीं बार नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। नीतीश कुमार बार-बार एक गठबंधन से दूसरे गठबंधन में जाने की वजह से पलटू राम के उपनाम से बदनामी झेल रहे हैं। लेकिन बिहार में पलटने वाले नेताओं की लिस्ट देखें तो यहां पलटीबाज़ नेताओं की भरमार है और सियासत में पलटू राम किस्म के नेता ही सफल रहे हैं। ऐसे पलटबाज नेता हर राजनीतिक दल में मौजूद हैं।
सियासत के मौसम वैज्ञानिक कहे जाने वाले दिवंगत राम विलास पासवान तो खुद ही स्वीकार करते थे कि राजनीति में सत्ता के साथ होने पर ही राजनेता कुछ कर सकते हैं । अपनी बायोग्राफी 'पासवान: संकल्प, साहस और संघर्ष' में लिखते हैं- सत्ता अगर आपके पास नहीं रहेगी, तो लोगों का काम आप नहीं करवा पाएंगे और धीरे-धीरे आपकी राजनीति नीचे चली जाएगी. ऐसे में रामविलास को बिहार की राजनीति में पलटने वाले नेताओं का सरदार कहा जा सकता है। अपने पूरे राजनीतिक करियर में पासवान ने 6 बार अलग अलग राजनीतिक दलों से जुड़े या गठबंघन में रहे। यही कारण है कि पासवान बिहार और देश की सियासत में मौसम वैज्ञानिक भी कहे जाते थे.
मांझी की नैया 7 बार पलटी: यही हाल बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी का भी है। मांझी पिछले 9 साल में 7 बार यूटर्न ले चुके हैं. इतना ही कांग्रेस, लालू यादव और नीतीश कुमार के साथ मिलकर 1980 के दशक से ही बिहार विधान सभा के सदस्य रहते हुए मांझी ने अब अपनी पार्टी भी बना ली है। पिछले तीन दशक में बिहार को लालू- राबड़ी राज और नीतीश के शासन के लिए जाना गया लेकिन इसमें मांझी भी एक ऐसे किरदार बने जो परिस्थितियों के मुख्यमंत्री बन गए।
भाजपा के सम्राट बड़े पलटीबाज़ : बिहार भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी का सियासी सफर भी पलटीबाज़ नेताओं वाला ही रहा है। लालू यादव की कृपा से कम उम्र में ही मंत्री बनने का आरोप झेलने से शुरू हुई सम्राट की सियासत उस समय चर्चा में आई जब वे लालू यादव की पार्टी के 13 विधायकों को तोड़कर नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में जा मिले। लेकिन सम्राट के पलटी मारते रहने का सिलसिला यहीं नहीं रुका। जदयू के खिलाफ जब वर्ष 2015 में जीतन राम मांझी ने बगावत की तो सम्राट ने उनका साथ दिया। सम्राट 2015 में जेडीयू छोड़ हम में शामिल हो गए। 2017 में जीतन राम मांझी से भी उनका मोह भंग हो गया और बीजेपी का दामन थाम लिया.
नागमणि ने 11 बार पलटी मारी : बिहार के पलटीबाज़ नेताओं में नागमणि ऐसे नेता रहे जो 23 सालों में 11 बार पलटी मार चुके हैं. इसी वजह से उन्हें केंद्रीय मंत्री बनने का भी मौका मिला था। बिहार के सर्वाधिक पलटीबाज़ नेताओं में नागमणि को पहले पायदान पर रखा जाता है। यही हाल उपेंद्र कुशवाहा का है। कुशवाहा अब तक 7 बार पलटी मार चुके हैं। 1985 में जनता दल से राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले कुशवाहा वर्तमान में राष्ट्रीय लोक जनता दल के मुखिया हैं। लेकिन कुशवाहा द्वारा बनाई गई यह तीसरी पार्टी है। ऐसा करने वाले वे बिहार के शायद एकलौते नेता हैं।