Bengal Election : भवानीपुर चुनाव विवाद को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा सुरक्षित रखे जाएंगे EVM और CCTV फुटेज
Bengal Election : ममता बनर्जी की याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट की सख्ती देखने को मिली है. जहाँ हाईकोर्ट ने कहा है की बिना इजाजत के भवानीपुर मतगणना के साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं जाएगी.
KOLKATA : पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनावी नतीजों को लेकर सियासी और कानूनी सरगर्मी चरम पर है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक बेहद अहम फैसला सुनाते हुए भवानीपुर सीट की मतगणना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सबूतों और रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। अदालत ने चुनाव परिणामों में धांधली और गड़बड़ी के आरोपों पर सुनवाई करते हुए निर्वाचन अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, VVPAT, CCTV फुटेज और अन्य सभी संबंधित दस्तावेजों को पूरी तरह संरक्षित रखा जाए।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: बिना इजाजत नहीं होगी कोई छेड़छाड़
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस गौरांग कांत ने मतगणना केंद्र बने शेखावाटी मेमोरियल स्कूल के अंदर और बाहर लगे सभी CCTV कैमरों की फुटेज को सुरक्षित रखने का विशेष निर्देश दिया। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा "भविष्य में जरूरत पड़ने पर इन सभी साक्ष्यों की गहन जांच की जाएगी। अदालत की लिखित अनुमति के बिना इन रिकॉर्ड्स को न तो मिटाया जाएगा, न बदला जाएगा, न नष्ट किया जाएगा और न ही इनके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की जाएगी।"इसके साथ ही, कोर्ट ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को शामिल करने के आदेश दिए हैं, जिसके तहत वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, उनके सलाहकार सुभ्रत गुप्ता और सुनील अग्रवाल को इस मामले में औपचारिक रूप से पक्षकार बनाया जाएगा।
ममता बनर्जी ने खुद हाईकोर्ट पहुंचकर दी थी चुनौती
गौरतलब है कि भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से हराया था। इस नतीजे के खिलाफ ममता बनर्जी ने बीती 16 जून को खुद कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचकर याचिका दायर की थी और नतीजों की वैधता की जांच करने की मांग की थी। ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भवानीपुर में चुनाव गलत तरीके से कराया गया। उन्होंने दावा किया, "12 राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद मेरे इलेक्शन एजेंट और मुझे पीटा गया और जबरन काउंटिंग सेंटर से बाहर निकाल दिया गया।" भवानीपुर सीट से तीन बार विधायक रह चुकीं ममता ने चुनाव के दौरान भी अपने साथ मारपीट और मतगणना में धांधली के आरोप लगाए थे।
स्ट्रॉन्गरूम विवाद और काउंटिंग के दिन का हाई-ड्रामा
इस मामले के तार 4 मई को आए चुनावी नतीजों से ठीक एक दिन पहले से जुड़े हैं। 3 मई को काउंटिंग सेंटर के बाहर उस वक्त भारी हंगामा हुआ था, जब टीएमसी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा के झंडे वाली एक कार को बिना किसी जांच के भवानीपुर के स्ट्रॉन्गरूम परिसर के अंदर जाने दिया गया। इस घटना के बाद ममता बनर्जी खुद करीब 4 घंटे तक स्ट्रॉन्गरूम में डटी रही थीं। अगले दिन 4 मई को मतगणना के दौरान शेखावाटी मेमोरियल स्कूल स्थित काउंटिंग सेंटर पहुंची ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि राज्य की कई सीटों पर जानबूझकर गिनती रोकी गई। उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्रीय बलों पर भाजपा के दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके पोलिंग एजेंटों को धक्का देकर बाहर निकाला गया और उन्हें खुद भी अंदर जाने से रोका गया।
शुभेंदु अधिकारी ने आरोपों को बताया 'ड्रामेबाजी'
दूसरी तरफ, इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने इसे ममता बनर्जी की 'ड्रामेबाजी' करार दिया था। उन्होंने कहा था कि ममता हार की आशंका से बौखला गई हैं और ईवीएम को लेकर लगाए जा रहे सारे आरोप पूरी तरह निराधार हैं। यह लगातार दूसरा मौका है जब दोनों नेताओं के बीच चुनावी मुकाबला अदालत पहुंचा है; इससे पहले 2021 के नंदीग्राम चुनाव में भी शुभेंदु ने ममता को 1,956 वोटों से हराया था, जिसके खिलाफ ममता की याचिका अभी भी कोर्ट में है।