Social Media Addiction: सोशल मीडिया पर सियासी शिकंजा, Meta-YouTube पर 56 करोड़ का जुर्माना, बच्चों की लत पर अदालत का ऐतिहासिक फरमान

Social Media Addiction:डिजिटल दुनिया की चमक-दमक के पीछे छिपे खतरों पर अब कानून का कोड़ा चलना शुरू हो गया है। ...

सोशल मीडिया पर कसा शिकंजा- फोटो : X

Social Media Addiction:डिजिटल दुनिया की चमक-दमक के पीछे छिपे खतरों पर अब कानून का कोड़ा चलना शुरू हो गया है। अमेरिका के लॉस एंजेलिस में एक जूरी के ऐतिहासिक फैसले ने सोशल मीडिया के ‘बेकाबू साम्राज्य’ पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक युवती की दरख्वास्त पर सुनवाई करते हुए अदालत ने Meta और YouTube पर करीब 56 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोक दिया है। यह फैसला न सिर्फ कानूनी बल्कि सियासी और सामाजिक बहस का नया दरवाजा खोल रहा है।

फैसले के मुताबिक कुल जुर्माने का 70 फीसदी Meta और 30 फीसदी Google को अदा करना होगा। जूरी ने इसे ‘अनैतिक’ करार देते हुए कंपनियों की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब दुनिया भर में सोशल मीडिया के खिलाफ हजारों मुकदमे चल रहे हैं और अभिभावक सड़कों से लेकर अदालतों तक आवाज उठा रहे हैं।

दरअसल, बीस वर्षीय पीड़िता केली ने इल्जाम लगाया था कि इन प्लेटफॉर्म्स की बनावट ही ऐसी है, जो यूजर्स को ‘लत’ का शिकार बना देती है। अब तक कंपनियां खुद को महज ‘माध्यम’ बताकर जिम्मेदारी से किनारा करती रही थीं, मगर अदालत में पेश दलीलों ने इस नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया। जूरी ने साफ कहा कि मुनाफे की होड़ में Meta और Google ने ऐसे एल्गोरिद्म और फीचर्स तैयार किए, जो किशोरों को बांधे रखते हैं और यही उनकी मानसिक सेहत पर भारी पड़ा।

ब्रिटेन, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया जैसे मुल्क पहले ही बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सख्त कानून बनाने की राह पर हैं। भारत में भी यह मुद्दा तेजी से सियासी एजेंडे में शामिल होता जा रहा है, जहां अब तक ठोस नियामक कानून की कमी साफ नजर आती है।

हालांकि, Meta और YouTube के कर्ताधर्ता इस फैसले से इत्तेफाक नहीं रखते और अपील की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि किशोरों की मानसिक समस्याओं के कई अन्य पहलू भी हो सकते हैं। लेकिन अदालत का यह हुक्म साफ इशारा दे रहा हैअब डिजिटल आजादी के नाम पर मनमानी नहीं चलेगी।

इस फैसले ने दुनिया भर के माता पिता को एक सुकून जरूर दिया है, मगर साथ ही एक नई बहस भी छेड़ दी है क्या सोशल मीडिया अब सख्त कानूनों के दायरे में आएगा, या फिर यह जंग अभी लंबी चलेगी?