भरत तिवारी एनकाउंटर पर नपा गए SDO, DSP को भी भेजा गया पुलिस मुख्यालय , सम्राट के एक्शन से अफसरों में हड़कंप

ख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के कुछ घंटे बाद ही सरकार ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए जगदीशपुर के एसडीओ संजीत कुमार को पद से हटा दिया। उन्हें तत्काल प्रभाव से सामान्य प्रशासन विभाग, पटना में वापस बुला लिया गया है।...

Bharat Tiwari Encounter Bihar Govt Removes SDO DSP Transferr
भरत तिवारी एनकाउंटर पर नपा गए SDO, DSP- फोटो : social Media

Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सम्राट सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। परिजनों की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के कुछ घंटे बाद ही सरकार ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए जगदीशपुर के एसडीओ संजीत कुमार को पद से हटा दिया। उन्हें तत्काल प्रभाव से सामान्य प्रशासन विभाग, पटना में वापस बुला लिया गया है।

वहीं, एनकाउंटर के समय जगदीशपुर के एसडीपीओ रहे डीएसपी राजेश शर्मा पर भी कार्रवाई की गई है। गृह विभाग ने उन्हें मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो से हटाकर पुलिस मुख्यालय में पदस्थापन की प्रतीक्षा में भेज दिया है। भरत तिवारी के परिजनों की ओर से उनके खिलाफ हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री आवास पर शुक्रवार को भरत तिवारी की मां आशा देवी समेत अन्य परिजनों ने सीएम सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। इस दौरान परिवार ने एनकाउंटर मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने परिजनों को न्याय का भरोसा दिलाया था। इसके बाद देर शाम सरकार की ओर से दोनों अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया गया।

भरत तिवारी मामले की जड़ भोजपुर के बिलौटी गांव के पास बसाए जा रहे बाढ़ पीड़ितों से जुड़ी बताई जा रही है। परिजनों का आरोप था कि भरत तिवारी विस्थापित परिवारों की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहा था और प्रशासन से शिकायत कर रहा था, लेकिन उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

परिजनों ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन जगदीशपुर एसडीओ से शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यहां तक कि एक बार एसडीओ कार्यालय में उसके साथ कथित मारपीट भी की गई थी। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस मामले पर अलग-अलग पक्ष सामने आते रहे हैं।पुलिस के अनुसार, भरत तिवारी लगातार प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी और धमकी दे रहा था। इसी मामले में पुलिस उसे पकड़ने गई थी, जहां 17 जून को हुई मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई।

एनकाउंटर के बाद से ही भरत तिवारी के परिजन लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि मामले में शामिल पुलिस अधिकारियों पर सख्त कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद सरकार के इस फैसले को परिजन की मांगों से जोड़कर देखा जा रहा है।वहीं डीएसपी राजेश शर्मा की पोस्टिंग को लेकर पहले भी सवाल उठे थे। एफआईआर में नाम आने के बाद उन्हें जगदीशपुर एसडीपीओ पद से हटाया गया था, लेकिन बाद में उन्हें मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो में जिम्मेदारी दी गई थी। अब सरकार ने उन्हें पुलिस मुख्यालय भेज दिया है।भरत तिवारी एनकाउंटर मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। सरकार के इस एक्शन के बाद अब निगाहें जांच की दिशा और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।