Bihar Crime News: खाकी के साए में कातिल आजाद! कोर्ट का हुक्म, फिर भी गिरफ्त से बाहर आरोपी, बिहार पुलिस पर लगा साठगांठ का संगीन इल्जाम

Bihar Crime News: बिहार की ख़ाकी एक बार फिर शक के कटघरे में है। इस बार इल्ज़ाम किसी सियासी विरोधी या आम फ़रियादी का नहीं, बल्कि सेना के रिटायर्ड इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार सिंह का है...

Bhojpur Killer Roams Free Under Khaki Shadow
बिहार पुलिस पर लगा साठगांठ का संगीन इल्ज़ाम- फोटो : reporter

Bihar Crime News: बिहार की ख़ाकी एक बार फिर शक के कटघरे में है। इस बार इल्ज़ाम किसी सियासी विरोधी या आम फ़रियादी का नहीं, बल्कि सेना के रिटायर्ड इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार सिंह का है, जिन्होंने दो थाना प्रभारियों पर क़ातिलों से मिलीभगत का सनसनीख़ेज़ आरोप लगाया है। मामला कोई नया नहीं, बल्कि बीस साल पुरानी दोहरी हत्या का है, जिसमें इंसाफ़ आज तक रास्ता भटकता नज़र आ रहा है।

भोजपुर जिले के मुफस्सिल थाना कांड संख्या 73/06 और सेशन ट्रायल 489/2006 में दर्ज इस केस में शादी समारोह के दौरान  वैजनाथ सिंह और  हरेराम की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। केस में हाकिम सिंह, गोपाल सिंह, कलयुग सिंह और सतयुग सिंह समेत कई नामजद आरोपी हैं। गवाहियों की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है, बहस और फ़ैसले की बारी थी लेकिन यहीं से कहानी ने ख़ौफ़नाक मोड़ ले लिया।

पूर्व सैनिक जितेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि कोर्ट ने छह महीने पहले आरोपियों की ज़मानत रद्द कर पुलिस को गिरफ्तारी का हुक्म दिया, बावजूद इसके आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। मुफस्सिल थाना पुलिस पर आरोप है कि वह कुंभकर्णी नींद में सोई है। थानाध्यक्ष राम कल्याण यादव पर कोर्ट के आदेशों को ठेंगा दिखाने का आरोप लग रहा है।

इल्ज़ाम और भी संगीन हैं। बताया जा रहा है कि मुख्य आरोपी हाकिम सिंह पहले भी हत्या के मामले में 20 साल की सज़ा काट चुका है, और इन लोगों पर दर्जनों हत्या, लूट और मारपीट के केस दर्ज हैं। इतना ही नहीं, पूर्व में एक एएसपी पर फायरिंग तक कर चुके ये लोग आज भी क़ानून की पकड़ से बाहर हैं। गवाहों और मृतकों के परिवार को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं, आलम यह है कि पीड़ित परिवार को घर छोड़कर पलायन करना पड़ा है।

पूर्व सैनिक डीजीपी से मिल चुके हैं, गृह मंत्री सम्राट चौधरी को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन जमीनी हक़ीकत वही कातिल बेख़ौफ, ख़ाकी ख़ामोश। सवाल लाज़मी है क्या यही है सुशासन?क्या ऐसे ही अपराधियों पर नकेल कसी जाएगी?या फिर अदालत के फ़रमान भी थाने की देहरी पर दम तोड़ते रहेंगे?