न सरकार के पास होगी धन की कमी, न युवाओं के पास काम; एक बड़े फैसले से बदलने वाली है इस जिले की तकदीर
भोजपुर जिले की आर्थिक तस्वीर बदलने वाली है। खनन विभाग ने जिले के 17 बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे सरकार के खजाने में ढाई अरब रुपये से अधिक का राजस्व आने की उम्मीद है।
Arrah - जिले में राजस्व वृद्धि और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए खनन विभाग ने एक बड़ी योजना पर काम शुरू कर दिया है। जिले के 17 महत्वपूर्ण बालू घाटों की नीलामी के लिए टेंडर प्रक्रिया आधिकारिक रूप से प्रारंभ कर दी गई है। इस कदम से न केवल सरकार के खजाने में भारी वृद्धि होगी, बल्कि नदी तटवर्ती इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
टेंडर और नीलामी की समय-सीमा
खनन विभाग के अनुसार, 6 जनवरी से टेंडर के कागजात डाउनलोड करने और निविदा डालने का कार्य शुरू हो चुका है। इच्छुक प्रतिभागी 28 जनवरी तक अपनी निविदा जमा कर सकते हैं। इन सभी बालू घाटों की अंतिम ऑनलाइन नीलामी 5 फरवरी को आयोजित की जाएगी। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन माध्यम का चुनाव किया गया है।
गंगा और सोन नदी के 17 घाट चयनित
इस बार की नीलामी में जिले की दो प्रमुख नदियों, सोन और गंगा को शामिल किया गया है। कुल 17 घाटों में से 12 बालू घाट सोन नदी के तट पर स्थित हैं, जबकि 5 घाट गंगा नदी के क्षेत्र में आते हैं। लगभग 450 हेक्टेयर के कुल क्षेत्रफल में फैले इन घाटों की न्यूनतम नीलामी राशि करीब 2.55 अरब रुपये (ढाई अरब से अधिक) आंकी गई है।
हजारों स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
नीलामी का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन है। खनन कार्य शुरू होने के बाद ट्रक, ट्रैक्टर, नाव संचालन, लोडिंग-अनलोडिंग, सुरक्षा और परिवहन जैसे क्षेत्रों में हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से काम मिलेगा। विशेष रूप से नदी के किनारे रहने वाले युवाओं के लिए यह आजीविका का एक बड़ा और स्थायी साधन साबित होगा।
सरेंडर किए गए घाटों की दोबारा नीलामी
इस टेंडर प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि इसमें उन 7 घाटों को भी शामिल किया गया है, जिन्हें पूर्व में ठेकेदारों ने घाटे के कारण सरेंडर कर दिया था। इनमें घाट संख्या 3, 5, 11, 22A, 22C, 39 और 41A शामिल हैं। विभाग को उम्मीद है कि निर्माण कार्यों में बालू की बढ़ती मांग को देखते हुए इस बार ये घाट निवेशकों के लिए फायदेमंद साबित होंगे।
सारीपुर घाट बना मुख्य आकर्षण
इस नीलामी में सबसे अधिक चर्चा घाट संख्या 11 (सारीपुर) की है। अकेले इस घाट का रकबा 77 हेक्टेयर है और इसकी बेस प्राइस (न्यूनतम कीमत) 33 करोड़ रुपये तय की गई है। राजस्व के लिहाज से इसे जिले का सबसे कीमती घाट माना जा रहा है। खनन शुरू होने से न केवल बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि कीमतों में भी स्थिरता आने की संभावना है।