बोर्ड बैठक में पति जी के हस्तक्षेप पर हंगामा,बिना पार्षदों की जानकारी योजनाएं लेने का आरोप,अमरपुर में गरमाई सियासत
Bihar News:बैठक में निर्वाचित जनप्रतिनिधि न होने के बावजूद मुख्य पार्षद पति की मौजूदगी और योजनाओं पर अपनी बात रखने पर विवाद गहरा गया।
Banka :जिले के अमरपुर नगर पंचायत कार्यालय परिसर में आयोजित सामान्य बोर्ड की मासिक बैठक में उस वक्त अफरा-तफरी और विवाद का माहौल बन गया, जब विकास योजनाओं के चयन और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों में बाहरी दखल का मुद्दा गरमा गया। बैठक में जब नगर पंचायत कर्मी ने पीसीसी सड़क और ढक्कनदार नाला निर्माण से जुड़ी योजनाओं के प्रस्ताव पढ़कर सुनाए, तो कई वार्ड पार्षदों ने कड़ा विरोध जताया।वार्ड नंबर 7 के पार्षद पंकज दास ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि बिना क्षेत्रीय पार्षद की सहमति और स्थल निरीक्षण के प्रस्ताव कैसे पास किए जा रहे हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि जिन स्थानों पर नाले और सड़क का प्रस्ताव दिया गया है, वहां निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है।
बैठक में निर्वाचित जनप्रतिनिधि न होने के बावजूद मुख्य पार्षद पति की मौजूदगी और योजनाओं पर अपनी बात रखने पर विवाद गहरा गया।बैठक के दौरान वार्ड नंबर 7 के पार्षद पंकज दास ने सदन में मुख्य पार्षद पति की मौजूदगी और हस्तक्षेप पर सख्त एतराज जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य बोर्ड की बैठक सिर्फ निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए होती है। योजनाओं पर चर्चा और फैसले सदन के दायरे में होने चाहिए, किसी गैर-निर्वाचित व्यक्ति के हस्तक्षेप से नहीं।"
यद्यपि कार्यपालक पदाधिकारी ने शुरू में केवल निर्वाचित सदस्यों को ही बैठक में रहने के निर्देश दिए थे, इसके बावजूद मुख्य पार्षद पति द्वारा चर्चा में हस्तक्षेप करने से माहौल काफी गर्म हो गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।स्थिति को बिगड़ता देख कार्यपालक पदाधिकारी अनुराग कुमार ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने मुख्य पार्षद पति को कार्यवाही से दूर रहने की सख्त हिदायत दी, जिसके बाद मामला शांत हो सका।
कार्यपालक पदाधिकारी ने पार्षदों को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसी भी योजना का प्राक्कलन कनीय अभियंता की जांच के बाद ही तैयार किया जाता है।सदन में उठाए गए सभी संवेदनशील मुद्दों और अनियमितता के आरोपों की नियमानुसार जांच कराई जाएगी।
इस पूरे वाकये ने अमरपुर नगर पंचायत में विकास योजनाओं की पारदर्शिता और क्रियान्वयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जन प्रतिनिधियों के भारी विरोध के बाद योजनाओं का दोबारा स्थल निरीक्षण होता है या नहीं।
चंद्रशेखर कुमार भगत कि रिपोर्ट