Bhagalpur silk exports: ईरान-अमेरिका तनाव का असर भागलपुर के सिल्क उद्योग पर! 30 करोड़ के साफा निर्यात पर संकट

Bhagalpur silk exports: ईरान-अमेरिका तनाव का असर भागलपुर के सिल्क उद्योग पर देखने को मिल रह है। 30 करोड़ के साफा निर्यात पर संकट छाया हुआ है। बुनकरों की आजीविका प्रभावित हुई है।

Bhagalpur silk exports
बुनकरों की आजीविका प्रभावित- फोटो : social media

Bhagalpur silk exports: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब बिहार के भागलपुर के प्रसिद्ध सिल्क उद्योग पर भी दिखने लगा है। युद्ध जैसे हालात और भारत सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी के बीच निर्यात कारोबार को लेकर स्थानीय व्यापारियों और बुनकरों की चिंता बढ़ गई है।

पहले से जूझ रहा है उद्योग

भागलपुर का सिल्क उद्योग पहले ही वैश्विक मंदी, बढ़ती लागत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध का भी उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा था। यूक्रेन को सिल्क फर्निशिंग उत्पादों का निर्यात पूरी तरह बंद हो गया, जिससे सालाना करीब 80 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। हालांकि अन्य बाजारों में स्कार्फ और फर्निशिंग कपड़ों की मांग बनी हुई है।

ईरान और खाड़ी देशों में बड़ी मांग

भागलपुर से ईरान सहित खाड़ी देशों में सिल्क की पगड़ी (साफा), स्कार्फ और लिनेन कुर्तों का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है। बिहार बुनकर कल्याण समिति के पूर्व सदस्य अलीम अंसारी बताते हैं कि धार्मिक और पारंपरिक आयोजनों में इन पगड़ियों की विशेष मांग रहती है।एक पगड़ी बनाने में करीब 11 मीटर उच्च गुणवत्ता वाला सिल्क कपड़ा लगता है, जिससे बुनकरों को निरंतर काम मिलता है।

30 करोड़ के वार्षिक कारोबार पर असर

अलीम अंसारी के अनुसार, सिर्फ ईरान को होने वाला साफा निर्यात लगभग 30 करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार से जुड़ा है। मौजूदा तनाव के कारण नए ऑर्डर धीमे पड़ गए हैं और पहले से बुक माल की शिपमेंट तथा भुगतान को लेकर भी अनिश्चितता है। यदि स्थिति लंबी खिंचती है, तो बैंकिंग लेन-देन, लेटर ऑफ क्रेडिट (LC), ट्रांसपोर्ट और बीमा लागत पर भी असर पड़ सकता है। समुद्री मार्गों में अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय बीमा दरों में वृद्धि से निर्यात महंगा हो सकता है।

बुनकरों की आजीविका पर संकट

भागलपुर का सिल्क उद्योग हजारों बुनकर परिवारों की रोजी-रोटी का आधार है। साफा निर्माण में करघा संचालक, रंगाई-प्रिंटिंग कारीगर, पैकिंग और परिवहन से जुड़े मजदूर बड़ी संख्या में कार्यरत हैं।बुनकर भोला तांती बताते हैं कि हाल के दिनों में व्यापारियों ने उत्पादन की रफ्तार धीमी कर दी है और नए डिजाइनों पर काम रोक दिया गया है। यदि हालात सामान्य नहीं हुए तो कच्चे माल की खरीद भी प्रभावित हो सकती है, जिससे रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा।

वैकल्पिक बाजार की तलाश

व्यापारी अब वैकल्पिक बाजारों की तलाश में जुट गए हैं। अलीम अंसारी के अनुसार, हाल ही में डेनमार्क के एक व्यवसायी नाथनगर आए थे और मार्च में डेनमार्क में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय एक्सपो के लिए सैंपल मांगे थे।चार दिन पहले तसर, मूंगा, तसर-कटिया और डूपियन सिल्क के सैंपल भेजे गए हैं। यदि वहां से ऑर्डर मिलता है, तो उद्योग को राहत मिल सकती है और बुनकरों को रोजगार का नया अवसर मिलेगा। व्यापारियों का मानना है कि यदि सरकार निर्यातकों को प्रोत्साहन, बाजार विस्तार और वित्तीय राहत प्रदान करे, तो मौजूदा संकट से उबरने में मदद मिल सकती है। फिलहाल सभी की नजरें अंतरराष्ट्रीय हालात के सामान्य होने पर टिकी हैं।