मुखिया है या गुंडा? भोजपुर में पैक्स अध्यक्ष रिंकू सिंह पर जानलेवा हमले का आरोप, SP से गुहार
भोजपुर: 'रिंकू मुखिया' पर घर में घुसकर जानलेवा हमले का आरोप। CCTV फुटेज और वीडियो मिलने के बाद भी अजीमाबाद थाना कांड संख्या 63/26 में गिरफ्तारी न होने पर उठे सवाल। पीड़ित ने SP से लगाई गुहार।
बिहार के भोजपुर जिले के अजीमाबाद थाना क्षेत्र के बड़गांव में दबदबे और कथित आपराधिक गतिविधियों को लेकर रिंकू सिंह उर्फ रिंकू मुखिया एक बार फिर चर्चा में हैं। वजह है 22 अगस्त 2026 की रात हुई मारपीट को लेकर भोजपुर एसपी को दिया गया लिखित आवेदन। आवेदनकर्ता कामेश्वर सिंह, पिता यदुनाथ सिंह, निवासी बड़गांव ने आरोप लगाया है कि रिंकू सिंह अपने भाई पंकज सिंह, सुमन सिंह और अन्य समर्थकों के साथ उनके गोतिया-पट्टीदार के घर में घुसे और विरोध करने पर लोहे की रॉड व छड़ से हमला कर उन्हें, उनके चचेरे भाई परमेश्वर सिंह, राजू सिंह और चाची देवती देवी को घायल कर दिया। आवेदन के मुताबिक सभी घायलों का इलाज अस्पताल में कराया गया। मामला अजीमाबाद थाना कांड संख्या 63/26 से जुड़ा बताया गया है। शिकायतकर्ता ने एसपी से आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। आवेदन में यह भी कहा गया है कि घटना का सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो मौजूद है तथा संबंधित वीडियो स्थानीय थाना को उपलब्ध कराया जा चुका है।
नाम मुखिया का, पद अभी पैक्स अध्यक्ष का
रिंकू सिंह को इलाके में ‘रिंकू मुखिया’ के नाम से जाना जाता है, लेकिन मौजूदा समय में वे मुखिया नहीं, बल्कि पैक्स अध्यक्ष हैं। उनके परिवार की राजनीतिक पकड़ की वजह से यह नाम लंबे समय से उनके साथ जुड़ा हुआ है। उनकी पत्नी पहले मुखिया रह चुकी हैं।रिंकू सिंह की पहचान सिर्फ पंचायत की राजनीति तक सीमित नहीं रही है। सार्वजनिक रिपोर्टों के मुताबिक वे राजपूत करणी सेना के बिहार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और क्षत्रिय समाज को संगठित करने से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय रहे हैं। 2021 में उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने की खबर प्रकाशित हुई थी। वर्ष 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में संदेश विधानसभा क्षेत्र से रिंकू मुखिया उर्फ संतोष कुमार सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया था। यानी एक तरफ सामाजिक और राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश, दूसरी तरफ अपने गांव में दबदबे को लेकर लगातार उठते सवाल—यही रिंकू सिंह की मौजूदा तस्वीर को विवादित बनाते हैं।
पैक्स में 70 लाख के गबन का मामला भी बताया जा रहा
स्थानीय स्तर पर रिंकू सिंह के खिलाफ पैक्स से जुड़े करीब 70 लाख रुपये के गबन का मामला चलने की बात सामने आई है। इस दावे की स्वतंत्र दस्तावेजी पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे आरोप/मामले के रूप में ही देखा जाना चाहिए। मौजूदा समय में वे पैक्स अध्यक्ष हैं।इसके अलावा उनके खिलाफ हत्या, मारपीट और रंगदारी जैसे मामलों में नाम आने का भी दावा किया जाता रहा है। सार्वजनिक रिपोर्टों में भी रिंकू सिंह का नाम भोजपुर के सतीश यादव हत्याकांड में आरोपी के तौर पर सामने आया था। हालांकि उपलब्ध एक राजनीतिक संगठन के रिकॉर्ड के अनुसार बाद में वे उस मामले में बरी हो गए थे। इसलिए पुराने आपराधिक मामलों को लेकर ‘आरोपी’ और ‘दोषी’ के बीच अंतर करना जरूरी है।
गांव में पंचायत भवन का निर्माण, घटिया सामग्री पर पहले भी विवाद का आरोप
फिलहाल बड़गांव में रिंकू सिंह की ओर से एक पंचायत भवन का निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाने पर पहले भी विवाद और मारपीट की घटनाएं हुई हैं। शिकायतकर्ता के आवेदन में भी रिंकू सिंह और उनके परिवार पर दबंगई का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि परिवार के कई सदस्यों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि रिंकू सिंह और उनके समर्थकों के प्रभाव के कारण स्थानीय स्तर पर लोग खुलकर विरोध करने से बचते हैं। शिकायतकर्ता ने तो यहां तक दावा किया है कि उनके परिवार को लगातार डर और सुरक्षा की चिंता बनी हुई है।
थाने से लेकर एसपी तक शिकायत, फिर भी गिरफ्तारी क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्रवाई को लेकर है। शिकायतकर्ता का कहना है कि घटना के बाद पुलिस को वीडियो उपलब्ध कराया गया, फिर भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। आवेदन में अजीमाबाद थाना कांड संख्या 63/26 के आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई है।शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि रिंकू सिंह की गिरफ्तारी को लेकर पहले पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से निर्देश दिए जाने की बात कही गई थी, बावजूद इसके वे क्षेत्र में सक्रिय हैं। आवेदन में पुलिस प्रशासन पर दबाव और प्रभाव का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि इससे आम लोगों में पुलिस के प्रति विश्वास प्रभावित हो रहा है।
‘दबंगई’ के आरोपों के बीच बड़ा सवाल
रिंकू सिंह का सार्वजनिक परिचय एक तरफ करणी सेना के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, क्षत्रिय समाज से जुड़े चेहरे और चुनाव लड़ चुके व्यक्ति का है, वहीं बड़गांव के इस ताजा विवाद ने उनके खिलाफ लगाए जा रहे दबंगई और आपराधिक प्रभाव के आरोपों को फिर चर्चा में ला दिया है। 2023 की एक स्थानीय खबर में भी उन्हें करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल बताया गया था।
अब सवाल यह है कि 22 अगस्त की मारपीट के मामले में पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है? क्या सीसीटीवी और मोबाइल वीडियो की जांच होगी? क्या आरोपियों की गिरफ्तारी होगी? और यदि शिकायतकर्ता के आरोप गलत हैं तो पुलिस जांच में उनकी सच्चाई सामने आएगी?