Bihar Medical Negligence: मौत के बाद मांगा इलाज का हिसाब, अस्पताल ने नहीं दिया चार्ट! 3 साल की कानूनी जंग के बाद पारस हॉस्पिटल पर 33.20 लाख का जुर्माना

Bihar Medical Negligence:जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अल्लपट्टी स्थित पारस ग्लोबल हॉस्पिटल को पीड़ित परिवार को ₹33 लाख 20 हजार मुआवजा अदा करने का आदेश दिया है।...

Paras Hospital Fined 33 2 Lakh
पारस हॉस्पिटल पर 33.20 लाख का जुर्माना- फोटो : reporter

Bihar Medical Negligence: दरभंगा में चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े एक सनसनीखेज मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अल्लपट्टी स्थित पारस ग्लोबल हॉस्पिटल को पीड़ित परिवार को ₹33 लाख 20 हजार मुआवजा अदा करने का आदेश दिया है। आयोग ने अस्पताल प्रबंधन को सेवा में गंभीर कमी, इलाज में लापरवाही और मरीज की मौत के मामले में दोषी ठहराते हुए 45 दिनों के भीतर भुगतान करने का हुक्म जारी किया है।

यह मामला वर्ष 2023 का है, जब खराजपुर निवासी 47 वर्षीय वरुण कुमार झा की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें 6 जनवरी की रात पारस ग्लोबल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि जांच के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को खतरे से बाहर बताया था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद अचानक उनकी हालत बिगड़ गई और आधी रात के आसपास उनकी मौत हो गई। इस अप्रत्याशित मौत के बाद परिवार ने इलाज की पूरी जानकारी और मेडिकल चार्ट की मांग की, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने मृत्यु के कारणों को लेकर गोलमोल जवाब दिया और परिजनों को केवल एक लाख से अधिक रुपये का बिल थमा दिया। जब मृतक के परिजनों ने बार-बार उपचार संबंधी दस्तावेज और इलाज का चार्ट मांगा तो कथित तौर पर उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद मृतक की पत्नी कल्पना झा, उनके बच्चों और परिवार की ओर से उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया गया।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष पियूष कमल दीक्षित और सदस्य अरुण कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद अस्पताल को दोषी माना। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि चिकित्सकीय लापरवाही के कारण हुई असमय मौत के लिए परिवार को विभिन्न मदों में कुल ₹33 लाख 20 हजार का मुआवजा दिया जाए।

आदेश के अनुसार मृतक के आश्रितों को आर्थिक क्षति, भविष्य की हानि, चिकित्सा व्यय, संपत्ति नुकसान, दांपत्य क्षति, दाह संस्कार खर्च और वाद व्यय सहित कुल मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो अस्पताल प्रबंधन को ब्याज सहित राशि अदा करनी होगी।

इस फैसले के बाद पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता मुरारी लाल केवट ने कहा कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार परिवार को इंसाफ मिला है। वहीं यह निर्णय चिकित्सा संस्थानों की जवाबदेही और मरीजों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण नज़ीर माना जा रहा है।

रिपोर्ट- वरुण कुमार ठाकुर