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BIHAR NEWS - स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली - जर्जर भवन में जान जोखिम में डाल इलाज कराने को मजबूर ग्रामीण

BIHAR NEWS - एक तरफ स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों के भवनों को सुधारने का दावा करती है। वहीं ग्रामीण इलाकों में संचालित पीएचसी के भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं. वहीं कोई विकल्प नहीं होने के कारण इसी जर्जर भवन से मरीजों का इलाज किया जा रहा है।

 BIHAR NEWS - स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली - जर्जर भवन में जान जोखिम में डाल इलाज कराने को मजबूर ग्रामीण

 KHAGARIA - रानीसकरपुरा अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कभी जिले का पहला 24×7 सेवा देने वाला केंद्र और पहला हेल्थ वेलनेस सेंटर के रूप में स्थापित हुआ था। जिले से महज 25 किलोमीटर दूर स्थित यह स्वास्थ्य केंद्र आज स्वास्थ्य विभाग के  लापरवाही और सरकारी उपेक्षा का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। यह केंद्र गरीब, गुरबा, और महादलित समुदाय के दर्जनों गांवों के हजारों लोगों के लिए एकमात्र स्वास्थ्य सेवा का स्रोत है। यहां अब तक सैकड़ों प्रसव हो चुके हैं, लेकिन हालत यह है कि मरीजों और गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए जर्जर भवन में अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।

 क्षेत्र में नहीं है कोई दूसरा विकल्प

वहीं ग्रामीण महेंद्र कुमार,और दीपक कुमार सिंह  ने बताया कि जर्जर भवन और टूटी चारदीवारी में इलाज कराने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य केंद्र का भवन बेहद खस्ताहाल है। दीवारों में दरारें, छत से टपकता पानी, और आसपास टूटी-फूटी चारदीवारी मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। बावजूद इसके, ग्रामीणों को मजबूरी में यहीं आना पड़ता है क्योंकि आसपास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है।

ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से लगाई गुहार, लेकिन नहीं मिली राहत

ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर स्थानीय विधायक रामवृक्ष सदा  , सांसद राजेश वर्मा स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी  से कई बार गुहार लगाई है। कई बार ज्ञापन सौंपे गए, शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन आज तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरकार की ओर से केवल आश्वासन ही मिला है, विकास के नाम पर जमीन पर कुछ नहीं दिख रहा है।

 स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही

सामाजिक कार्यकर्ता अमन पाठक ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की उपेक्षा और लापरवाही का ही नतीजा है कि इतने महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र के लिए अब तक नया भवन नहीं बन पाया। यह सवाल उठाता है कि क्या स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ केवल कागजों तक ही सीमित है?

 हमने हर दरवाजा खटखटाया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। आखिर हम अपनी जान खतरे में डालकर इलाज क्यों कराएं?”  “यहां प्रसव के दौरान कई बार हालात गंभीर हो जाते हैं  ,और कितना बार जान से हाथ धोना पड़ा क्योंकि सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। रात में कोई डॉक्टर नहीं रहता है ,और  नर्स को जब मन होता है तब आती हैं नहीं तो नहीं आती है!

अधिकारियों ने नहीं सुनी बात

इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिला। कुछ अधिकारियों का कहना है कि “प्रक्रिया चल रही है”, लेकिन वर्षों से यही प्रक्रिया जारी है, नतीजा शून्य।

बताते चलें कि सरकार की घोषणाओं और योजनाओं के बीच रानी सकरपुरा स्वास्थ्य केंद्र अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। सवाल यह है कि क्या गरीब और महादलित समुदायों के स्वास्थ्य के साथ यूं ही खिलवाड़ होता रहेगा?

खगड़िया से अमित की रिपोर्ट

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