Bihar Hot Water from Hand Pump: बिहार में धरती के नीचे उबलता रहस्य, खगड़िया के चार गांवों में चापाकलों से निकल रहा गरम पानी, खौलते पानी से ग्रामीण परेशान

Bihar Hot Water from Hand Pump: एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने वैज्ञानिकों से लेकर प्रशासन तक को भी सोच में डाल दिया है।....

Khagaria Villages Report Boiling Groundwater Mystery
बिहार में धरती के नीचे उबलता रहस्य- फोटो : social Media

Bihar Hot Water from Hand Pump: एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने वैज्ञानिकों से लेकर प्रशासन तक को भी सोच में डाल दिया है। खगड़िया जिले के अलौली प्रखंड के सहरबन्नी पंचायत के पाठक टोला-मुशहरीडीह, पिपरा, बेलदारी और चेराखैरा पंचायत के हरदिया गांव में वर्षों से चापाकलों से सामान्य पानी नहीं, बल्कि गर्म और कई बार खौलता हुआ पानी निकल रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या मौसम पर निर्भर नहीं है, बल्कि साल भर बनी रहती है, और सर्दियों में तो पानी और भी ज्यादा गर्म महसूस होता है।

गांवों की स्थिति ऐसी हो गई है कि पीने के पानी के लिए ग्रामीणों को आज भी संघर्ष करना पड़ता है। घर आए मेहमानों के लिए पीने का पानी लगभग 4 किलोमीटर दूर सहरबन्नी गांव से लाना पड़ता है। इस असुविधा के कारण कई लोग यहां रिश्तेदारी करने से भी कतराने लगे हैं, जिससे सामाजिक जीवन पर भी असर पड़ा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि चापाकलों से निकलने वाला पानी इतना गर्म होता है कि उसे सीधे पीना तो दूर, हाथ लगाने पर भी जलन महसूस होती है। गांव के  लोगों ने बताया कि वर्षों से यह समस्या जस की तस बनी हुई है, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। इस अनोखी घटना की जांच के लिए कई बार प्रशासनिक और वैज्ञानिक टीमें गांवों में पहुंच चुकी हैं। पानी के नमूने भी लिए गए और परीक्षण भी किए गए, लेकिन अब तक किसी स्पष्ट वैज्ञानिक कारण की पुष्टि नहीं हो पाई है। यही कारण है कि यह मामला आज भी रहस्य बना हुआ है।

ग्रामीणों के अनुसार, चेराखैरा पंचायत के हरदिया गांव में भी यही स्थिति है और वहां कई स्थानों पर पानी का तापमान लगभग 93.7 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किए जाने का दावा किया जाता है। जबकि सामान्य भूजल का तापमान लगभग 20 से 25 डिग्री सेल्सियस माना जाता है। ऐसे में यह अंतर और भी चौंकाने वाला बन जाता है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि ग्रामीणों के मुताबिक सर्दियों में यह गर्म पानी और ज्यादा तीव्र हो जाता है, जबकि बरसात के मौसम में यह अपेक्षाकृत सामान्य लगता है, लेकिन फिर भी यह पीने योग्य ठंडा पानी नहीं होता।ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल जांच और आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार और प्रशासन को इस रहस्यमय समस्या का स्थायी और वैज्ञानिक समाधान निकालना होगा। फिलहाल यह ‘धरती के भीतर उबलता रहस्य’ गांवों के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और सामाजिक संबंधों दोनों पर भारी पड़ रहा है।