Bihar Health News: PHC में लापरवाही की खुली पोल, प्रभारी समेत कई डॉक्टर मिले गायब

Bihar Health News: सिविल सर्जन के औचक निरीक्षण में अस्पताल में मरीजों की भीड़ मिली, लेकिन अस्पताल प्रभारी समेत कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अनुपस्थित पाए गए। ...

Bihar Health News: PHC में लापरवाही की खुली पोल, प्रभारी समे
PHC में लापरवाही की खुली पोल- फोटो : reporter

Bihar Health News: बिहार में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच पूर्वी चंपारण जिले के कोटवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सिविल सर्जन के औचक निरीक्षण में अस्पताल में मरीजों की भीड़ मिली, लेकिन अस्पताल प्रभारी डॉ. सचिन कुमार, बीसीएम मनीष कुमार शर्मा समेत कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अनुपस्थित पाए गए। अस्पताल में दवाइयों के रखरखाव में भी लापरवाही सामने आई। इस पर सिविल सर्जन ने सख्त रुख अपनाते हुए अनुपस्थित कर्मियों की हाजिरी काटने और वेतन संबंधी कार्रवाई करने के साथ विभाग को पत्र लिखने की बात कही।

हैरानी की बात यह है कि करीब 15 दिन पहले सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) के निरीक्षण में भी अस्पताल प्रभारी समेत कई डॉक्टर अनुपस्थित मिले थे। उस समय भी संबंधित प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं होने से अस्पताल के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं।

सुबह 10 बजे पहुंचे सिविल सर्जन, अस्पताल में मचा हड़कंप

जानकारी के अनुसार, मोतिहारी के सिविल सर्जन ने कोटवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। सुबह करीब 10 बजे अस्पताल पहुंचे अधिकारी ने सबसे पहले स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था, कर्मचारियों की उपस्थिति और दवाइयों के रखरखाव का जायजा लिया।निरीक्षण के दौरान कई कर्मचारियों की अनुपस्थिति सामने आई। अस्पताल प्रभारी डॉ. सचिन कुमार और बीसीएम मनीष कुमार शर्मा सहित कई डॉक्टर एवं स्वास्थ्यकर्मी अपनी ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिले। मरीजों की भीड़ के बीच जिम्मेदार कर्मियों की गैरमौजूदगी को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन ने मौके पर ही अनुपस्थित कर्मचारियों की हाजिरी काटने की कार्रवाई की।अस्पताल में इस तरह की स्थिति सामने आने के बाद स्वास्थ्य केंद्र के प्रबंधन और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना और निर्धारित समय पर चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है।

दवाइयों के रखरखाव में भी मिली अव्यवस्था

निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन ने अस्पताल में दवाइयों को अव्यवस्थित तरीके से रखे जाने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने दवाइयों के उचित रखरखाव और स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का निर्देश दिया।

अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण जगह पर दवाइयों का सही तरीके से रखरखाव और मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। ऐसे में निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को लेकर सिविल सर्जन ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाए और व्यवस्था में सुधार लाने को कहा।

15 दिन पहले भी अनुपस्थित मिले थे डॉक्टर

कोटवा पीएचसी में लापरवाही का मामला पहली बार सामने नहीं आया है। लगभग दो सप्ताह पहले सदर एसडीओ के निरीक्षण में भी अस्पताल प्रभारी समेत कई डॉक्टर अनुपस्थित पाए गए थे। उस समय संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया था।इसके बावजूद दोबारा निरीक्षण में इसी तरह की स्थिति सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के बाद अस्पताल प्रबंधन के कामकाज में कितना सुधार होता है।सिविल सर्जन ने बताया कि अस्पताल प्रभारी डॉ. सचिन कुमार की अनुपस्थिति से संबंधित शिकायत पहले भी सामने आई थी और इस मामले में पूर्व में वेतन रोकने की कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान मामले में भी विभाग को पत्र लिखकर आगे की कार्रवाई करने के लिए कहा जा रहा है। बीसीएम की अनुपस्थिति को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई और कार्रवाई की बात कही।

मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने पर जोर

सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में अधिकारियों और कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति अनिवार्य है। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।कोटवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ यह भी अहम होगा कि अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो तथा दवाइयों के रखरखाव से लेकर मरीजों के इलाज तक की व्यवस्था में ठोस सुधार किया जाए।

रिपोर्ट- हिमांशु कुमार