कांग्रेस का डिजिटल दांव: 'संगठन सृजन अभियान' के तहत लॉन्च हुआ ऐप, जमीनी कार्यकर्ताओं को मिलेगा पद
Munger : बिहार प्रदेश कांग्रेस ने संगठन को वैचारिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए मुंगेर में 'संगठन सृजन अभियान' की शुरुआत की है। मुंगेर के तिलक मैदान स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी नेताओं ने 'बीपीसीसी (BPCC) ऐप' को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया। इस डिजिटल पहल का मुख्य उद्देश्य राज्यभर में नए और पुराने कार्यकर्ताओं को एक साझा प्लेटफॉर्म पर लाकर संगठन की शक्ति को बढ़ाना है।
नए और पुराने कार्यकर्ताओं का होगा संगम
पार्टी नेताओं ने बताया कि इस अभियान के जरिए जिला भर में 'संगठन सृजन साथी' बनाए जाएंगे। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें उन कार्यकर्ताओं को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी, जो लंबे समय से पार्टी के लिए समर्पित रहे हैं लेकिन अब तक किसी आधिकारिक पद पर नहीं पहुँच सके हैं। ऐप के माध्यम से अब कार्यकर्ता अपनी योग्यता और सक्रियता के आधार पर प्रखंड, जिला और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों के लिए सीधा आवेदन कर सकेंगे।
डिजिटल ट्रेनिंग से मिलेगी धार
कांग्रेस के अनुसार, यह ऐप केवल डेटा जुटाने का जरिया नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से कार्यकर्ताओं को विशेष ट्रेनिंग भी दी जाएगी। पार्टी का मानना है कि डिजिटल माध्यम से जुड़कर कार्यकर्ता बेहतर संवाद कर सकेंगे और पिछली संगठनात्मक गलतियों को सुधारने में मदद मिलेगी। इस ऐप की निगरानी सीधे राष्ट्रीय स्तर पर की जा रही है, जिससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता रहने की उम्मीद है।
संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कवायद
जिलाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से समाज को जोड़ने का काम करती रही है और वर्तमान डिजिटल युग में संगठन को मजबूत करने के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पहल से न केवल पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को एक नई ऊर्जा मिलेगी। कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें पार्टी की विचारधारा से और अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ा जाएगा।
आगामी चुनावों पर टिकी नजर
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस का यह डिजिटल अभियान आने वाले चुनावों की तैयारियों का हिस्सा है। डिजिटल मेंबरशिप और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के जरिए पार्टी युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह तकनीकी पहल पारंपरिक राजनीति वाली कांग्रेस को चुनावी मैदान में कितना लाभ पहुँचाती है और कार्यकर्ताओं के बीच पद वितरण की यह नई व्यवस्था कितनी सफल रहती है।
इम्तियाज खान की रिपोर्ट