Bihar News : मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के.झा ने बिलौटी गांव का किया दौरा, मृतक भरत भूषण तिवारी के परिजनों को न्याय का दिया भरोसा
Bihar News : मुजफ्फरपुर के मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस.के.झा आज भोजपुर जिले के बिलौटी गाँव स्थित भरत भूषण तिवारी के घर पहुँचे और मृतक भरत भूषण तिवारी के परिजनों का हाल-चाल लिया.....पढ़िए आगे
MUZAFFARPUR : जिले के जाने-माने मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस.के.झा ने रविवार को भोजपुर जिले के बिलौटी गांव का दौरा किया। इस दौरान वे सीधे मृतक भरत भूषण तिवारी के पैतृक आवास पर पहुंचे और शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। अधिवक्ता झा ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और मानवाधिकार आयोग में चल रहे मुकदमे की वर्तमान स्थिति तथा कानूनी पहलुओं से उन्हें विस्तार से अवगत कराया।
विदित हो कि मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के.झा द्वारा दायर की गई विशेष याचिका (पिटीशन) पर ही मानवाधिकार आयोग में इस संवेदनशील मामले की नियमित सुनवाई चल रही है। गांव के दौरे के समय झा ने परिजनों के साथ बैठकर मामले की आगामी कानूनी रणनीति और वर्तमान में चल रही न्यायिक जांच की प्रगति पर गंभीर विचार-विमर्श किया। उन्होंने बताया कि बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के कड़े दिशा-निर्देशों के आलोक में बिहार सरकार को मृतक भरत भूषण तिवारी के आश्रितों को वित्तीय मुआवजा भी प्रदान करना है, जिसकी प्रक्रिया जारी है।
परिजनों से संवाद स्थापित करने के बाद मीडिया से बातचीत में मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के.झा ने न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा, "मुझे देश के कानून और मानवाधिकार आयोग की निष्पक्षता पर पूर्ण विश्वास है। पीड़ित परिवार ने जो दर्द झेला है, उसकी भरपाई तो नहीं हो सकती, लेकिन दोषी बचेंगे नहीं। इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई आगामी 3 अगस्त को होने वाली है, जहां हम मजबूती से अपनी दलीलें पेश करेंगे और परिवार को हर हाल में न्याय दिलाएंगे।"
इस अहम दौरे पर मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के.झा के साथ उनकी विशेष विधिक (लीगल) टीम भी मौजूद रही। इस टीम में प्रख्यात अधिवक्ता प्रफुल्ल कुमार श्रीवास्तव, कबीर राज, मोहम्मद एहसान, आलोक कुमार सिन्हा, अभिषेक झा और रवि रंजन शाही शामिल थे। कानूनी टीम ने भी पीड़ित परिवार को आश्वस्त किया कि वे इस मामले की हर स्तर पर मुफ्त और निष्पक्ष पैरवी कर रहे हैं।
इस दौरे के बाद से पीड़ित परिवार और स्थानीय ग्रामीणों में न्याय मिलने की उम्मीद एक बार फिर जग गई है। मानवाधिकार टीम के इस सक्रिय कदम की बिलौटी और आस-पास के गांवों में काफी सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के बीच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की यह पहल समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को संबल प्रदान करती है।
मणिभूषण की रिपोर्ट