Bihar News: नालंदा में सजा साहित्य का गुलिस्तां, भक्ति, राष्ट्रप्रेम और तंज से सराबोर रहा अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
Bihar News: साहित्य की पावन और रूहानी ज़मीन नालंदा पर हाल ही में नवोत्साह साहित्य संगम की जिला इकाई के तत्वावधान में एक भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।...
Bihar News: साहित्य की पावन और रूहानी ज़मीन नालंदा पर हाल ही में नवोत्साह साहित्य संगम की जिला इकाई के तत्वावधान में एक भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह महफ़िल सिर्फ चंद घंटों का जलसा नहीं थी, बल्कि ज़ुबान, तहज़ीब और जज़्बातों का एक ऐसा संगम थी जिसने हर सुनने वाले के दिल को गहराई से छू लिया। श्री राम की असीम महिमा और रूहानी भक्ति से लेकर समकालीन सामाजिक सरोकारों और गुदगुदाते हास्य-व्यंग्य तक, हर एक लफ़्ज़ और हर एक अंदाज़-ए-बयाँ ने इस शाम को यादगार बना दिया।
अदब और जज़्बात का हसीन संगम
कार्यक्रम का आगाज और संचालन करते हुए संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष अविनाश कुमार पांडेय ने बहुत ही संजीदा बात कही। उन्होंने फरमाया कि साहित्य समाज की धड़कनों और उसकी संवेदनाओं को आवाज़ देने का सबसे सशक्त ज़रिया है। ऐसे मुक़द्दस आयोजन न सिर्फ अदब को आम अवाम तक पहुँचाते हैं, बल्कि नई नस्ल को उसकी बेहतरीन रिवायतों और संस्कृति से जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि साल 2027 तक बिहार के हर जिले में संस्था की इकाइयां क़ायम करने का संकल्प लिया गया है।प्रांतीय अध्यक्ष उत्पल भारद्वाज ने अपने खिताब में नालंदा की ऐतिहासिक तवारीख और तहमद पर रोशनी डालते हुए कहा कि यह ख़ित्ता ज्ञान और फिक्र का मरकज़ रहा है। कविता महज़ दिल बहलाने का ज़रिया नहीं, बल्कि सोए हुए जमीर को जगाने और समाज को नई रोशनी दिखाने का आईना है।

शेरो-शायरी और तंज की धार
इस शाम के मीठे अनुभवों को परवान चढ़ाने देश के कोने-कोने से मशहूर शायर और कवि तशरीफ़ लाए थे। दमदार बनारसी, प्रीति पांडेय, ओंकार शर्मा कश्यप, डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ल वत्स, डॉ. पंकज झा, मीना बंधन, सागर आनंद, गौतम सरगम, शंकर भगवान सिंह, प्रीतम झा, साकेत ध्रुव और श्रुति श्रीवास्तव जैसे मारूफ अदीबों ने अपने कलाम से समां बांध दिया।

कवियों ने जहाँ एक ओर 'श्रीराम जगत के स्वामी हैं' के रूहानी और पाकीज़ा एहसासात से महफ़िल को सराबोर किया, वहीं दूसरी ओर ज़िंदगी की कड़वी सच्चाइयों और समाज की नब्ज को टटोलती रचनाओं से श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। हास्य-व्यंग्य के तीखे तीरों ने जब महफ़िल में ठहाकों की गूंज पैदा की, तो तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल गूंज उठा।देर रात तक चले इस अदबी जश्न में नितेश कपूर, डॉ. प्रणव कुमार, चंदन कुमार, डॉ. बच्चन पांडेय, धर्मवीर कुमार और संध्या कुमारी जैसी मुमताज़ हस्तियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम की रौनक को और बढ़ा दिया। यह शाम इस बात की गवाह बनी कि जब लफ्ज़ों में सच्चाई और कला में रूह हो, तो वह महफ़िल दिलों पर हमेशा के लिए नक्श हो जाती है। नालंदा की इस पुरनूर शाम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अदब और तहज़ीब की खुशबू हमेशा इस जमीन पर महकती रहेगी।
रिपोर्ट-राज पाण्डेय