Bihar News : नालंदा विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद की हुई शुरूआत, 15 से अधिक कुलपति और 12 से ज्यादा तकनीकी संस्थानों के निदेशक हुए शामिल

Bihar News : अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय में सोमवार को ‘विकसित भारत के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का भव्य शुभारंभ हुआ........पढ़िए आगे

Bihar News : नालंदा विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय पर
राष्ट्रीय परिसंवाद की शुरूआत- फोटो : RAJ

NALANDA : अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय में सोमवार को ‘विकसित भारत के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का भव्य शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के विश्वमित्रालय सभागृह में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हसनैन ने किया। 21 और 22 सितंबर को होने वाले इस राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन नालंदा विश्वविद्यालय और नई दिल्ली स्थित शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। परिसंवाद में देशभर के शिक्षाविद, शोधकर्ता, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, तकनीकी संस्थानों के निदेशक और अन्य विद्वान शामिल हुए हैं। दो दिनों तक भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता, आधुनिक शिक्षा एवं शोध के साथ इसके समन्वय तथा विकसित भारत के निर्माण में इसकी भूमिका पर मंथन किया जाएगा। उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने विषय प्रवर्तन करते हुए परिसंवाद के उद्देश्यों और इसकी रूपरेखा पर प्रकाश डाला। देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् प्रो. रमेश भारद्वाज ने आयोजन की विस्तृत प्रस्तावना रखी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व उपाध्यक्ष प्रो. भूषण पटवर्धन ने भी विशिष्ट अतिथि के रूप में विचार रखे।

भारत की ज्ञान परंपरा को विकास से जोड़ने पर जोर

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हसनैन ने कहा कि भारत की असली शक्ति उसकी ज्ञान परंपरा में रही है। आज नालंदा में इसी बात पर विचार किया जा रहा है कि भारत की इस विरासत और ज्ञान को वर्तमान समय में किस तरह उपयोग में लाकर विकसित भारत के निर्माण में योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिष्ठित विद्वान और शिक्षाविद् इस परिसंवाद में पहुंचे हैं। दो दिनों का यह आयोजन इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

नई शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम पर होगा मंथन

कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा पर आयोजित इस दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद में देशभर से 15 से अधिक कुलपति और 12 से ज्यादा तकनीकी संस्थानों के निदेशक पहुंचे हैं। कई संस्थानों के महानिदेशक भी इसमें भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि परिसंवाद में इस बात पर चर्चा होगी कि भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा व्यवस्था में प्रभावी ढंग से कैसे शामिल किया जाए, शिक्षकों को इसके लिए किस तरह प्रशिक्षित किया जाए और विद्यार्थियों के लिए इससे जुड़े विषयों को पाठ्यक्रम का हिस्सा कैसे बनाया जाए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत केंद्र सरकार जिस नए पाठ्यक्रम को लागू करने की दिशा में काम कर रही है, उसे स्थानीय स्तर पर विश्वविद्यालय किस तरह मूर्त रूप दे सकते हैं, इस पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। नालंदा विश्वविद्यालय ने बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के साथ-साथ झारखंड और आसपास के अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों को भी परिसंवाद से जोड़ने का प्रयास किया है।

भारत के आयामों पर मंथन

प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि यह आयोजन केवल भारतीय ज्ञान परंपरा की चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालयों को विकसित भारत के निर्माण की व्यापक जिम्मेदारी के लिए तैयार करने का प्रयास है। अगले दो दिनों में विभिन्न सत्रों और कार्यशालाओं के माध्यम से विकसित भारत के विभिन्न आयामों और उनमें विश्वविद्यालयों की भूमिका पर विस्तार से मंथन किया जाएगा।

राज की रिपोर्ट