बिहार को केंद्र का बड़ा तोहफा, 16 जिलों में खुलेंगे 19 नए केंद्रीय विद्यालय, सभी 38 जिलों में पहुंचेगी KV सुविधा

Bihar Kendriya Vidyalaya: केंद्र सरकार ने बिहार के 16 जिलों में 19 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की मंजूरी दे दी है।...

19 New Kendriya Vidyalayas
16 जिलों में खुलेंगे 19 नए केंद्रीय विद्यालय- फोटो : social Media

Bihar Kendriya Vidyalaya: बिहार में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य के 16 जिलों में 19 नए केंद्रीय विद्यालय (KV) खोलने की मंजूरी दे दी गई है। इन नए विद्यालयों के शुरू होने के बाद बिहार के सभी 38 जिलों में केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़कर 72 हो जाएगी। वर्तमान में राज्य में कुल 53 केंद्रीय विद्यालय संचालित हैं।

केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद राज्य में केंद्रीय विद्यालयों का नेटवर्क और मजबूत होगा। राज्य सरकार की ओर से 14 जिलों में 17 केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना के लिए जमीन चिह्नित कर प्रस्ताव भेजा गया था। वहीं, भारत तिब्बत सीमा पुलिस  ने कटिहार और सशस्त्र सीमा बल ने सीतामढ़ी में एक-एक केंद्रीय विद्यालय खोलने का प्रस्ताव दिया था। इन सभी प्रस्तावों को स्वीकृति मिल गई है।

नए केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना के लिए राज्य सरकार ने निःशुल्क जमीन उपलब्ध कराई है। शुरुआती दौर में विद्यालयों के संचालन के लिए अस्थायी भवनों की भी पहचान कर ली गई है, ताकि छात्रों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।इन नए विद्यालयों का सबसे बड़ा फायदा उन जिलों को मिलेगा, जहां अभी तक केंद्रीय विद्यालय की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इनमें मधुबनी, शेखपुरा, कैमूर, अरवल और मधेपुरा जैसे जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों के छात्रों को अब गुणवत्तापूर्ण और केंद्रीय शिक्षा प्रणाली का लाभ अपने जिले में ही मिल सकेगा।

जिन जिलों में नए केंद्रीय विद्यालय खुलने की मंजूरी मिली है, उनमें पटना, नालंदा और मधुबनी में दो-दो विद्यालय शामिल हैं। जबकि मुंगेर, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, भोजपुर, गया, भागलपुर, कैमूर, मधेपुरा, शेखपुरा, दरभंगा और अरवल में एक-एक नए केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की जाएगी।पटना जिले को भी इसका बड़ा लाभ मिलेगा। वर्तमान में यहां पांच केंद्रीय विद्यालय संचालित हैं। दो नए विद्यालय खुलने के बाद जिले में केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़कर सात हो जाएगी।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि केंद्रीय विद्यालयों की बढ़ती संख्या से न केवल छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा, बल्कि ग्रामीण और छोटे शहरों के विद्यार्थियों को भी राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिलेगा।