अधर में दो लाख मैट्रिक और इंटर के बच्चों का भविष्य, आधार कार्ड के फेर में अधर में लटकी 2.17 लाख बच्चों की अपार आईडी,12 वीं की परीक्षा से होंगे वंचित, कौन सा रास्ता बचा हैं पढ़िए
APAAR ID: पटना में शिक्षा विभाग के फरमान पर फिरा पानी आधार कार्ड के फेर में अधर में लटकी 2.17 लाख बच्चों की 'अपार' आईडी...
APAAR ID:बिहार की राजधानी पटना के सरकारी और निजी स्कूलों में शिक्षा हासिल कर रहे बच्चों के भविष्य को संवारने की मुहिम फिलहाल सुस्त पड़ती दिखाई दे रही है। शिक्षा विभाग ने सूबे के तमाम स्कूलों को 10 जुलाई तक शत-प्रतिशत छात्रों की 'अपार' (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) आईडी बनाने का सख्त हुक्म जारी किया था। लेकिन अफ़सोस, आखिरी डेडलाइन गुज़र जाने के बाद भी लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका। शिक्षा विभाग की यह कवायद ज़मीनी दिक्कतों के चलते पूरी तरह परवान नहीं चढ़ सकी है।
जानकारी के मुताबिक, पटना जिले के पहली से बारहवीं कक्षा तक के करीब 2 लाख 17 हजार छात्र-छात्राओं की अपार आईडी अब तक खटाई में पड़ी है। इस नाकामी की सबसे बड़ी वजह यह सामने आई है कि इन बड़ी तादाद में मौजूद बच्चों के पास अब तक उनका पहचान पत्र यानी आधार कार्ड ही मयस्सर नहीं है। नियमों के मुताबिक, जब तक 'ई-शिक्षा कोष' और 'यू-डायस' (UDISE) पोर्टल पर बच्चों का आधार डेटा मुकम्मल तौर पर अपडेट नहीं होगा, तब तक उनकी अपार आईडी जेनरेट होना कतई मुमकिन नहीं है। जिले में कुल नामांकित 8,02,246 विद्यार्थियों में से दो लाख से ज़ायद बच्चों का आधार नंबर न होना प्रशासन की मुस्तैदी पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
जिला शिक्षा कार्यालय ने इस सूरतेहाल पर गहरी चिंता ज़ाहिर करते हुए आगाह किया है कि अगर बच्चों का आधार कार्ड फौरन नहीं बना, तो आने वाले दिनों में उन्हें मैट्रिक और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं के रजिस्ट्रेशन में भारी मुश्किलात का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा, स्कॉलरशिप और पोशाक जैसी तमाम सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने से भी ये वंचित रह जाएंगे।
इस गंभीर मसले को हल करने के लिए विभाग ने ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर्स (बीईओ) और हेडमास्टरों को युद्ध स्तर पर काम करने का आदेश दिया है। हालांकि, मौजूदा वक्त में स्कूलों के अंदर चल रहे आधार केंद्र बंद पड़े हैं, जिससे अभिभावकों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। इस दुश्वारी को दूर करने के लिए उप विकास आयुक्त (DDC) के ज़ेरे-निगरानी चल रहे 49 मुफ़्त आधार केंद्रों को इस काम में मुस्तैद किया गया है, ताकि बच्चे बिना किसी फीस के अपना नया आधार बनवा सकें या उसमें जरूरी इस्लाह (सुधार) करा सकें।