संविधान की रक्षा में न्यायपालिका की मजबूती जरूरी, आम आदमी को मिले समय पर न्याय : देव ज्योति

देश के अंदर मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर मचे बवाल के बीच वीआईपी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा है कि ऐसे दौर में जब नागरिकों के मौलिक अधिकारों, चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चर्चा हो रही है,तब न्याय मिलने की उम्मीद

संविधान की रक्षा में न्यायपालिका की मजबूती जरूरी, आम आदमी को
वीआईपी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता बड़ा बयान- फोटो : सोशल मीडिया

Patna : विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता देव ज्योति ने कहा है कि वर्तमान समय में देश के भीतर संविधान, लोकतांत्रिक अधिकारों और न्यायपालिका की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। न्यायपालिका को देश के संविधान का मुख्य संरक्षक माना जाता है और आम नागरिकों को न्याय पाने की उससे गहरी उम्मीद होती है। ऐसे दौर में जब नागरिकों के मौलिक अधिकारों, चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चर्चा हो रही है, तब न्याय मिलने की उम्मीद और अधिक मजबूत होनी चाहिए।


संस्थाओं के बीच संतुलन और आदेशों का अनुपालन

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की शक्तियां असीमित नहीं होती हैं। हमारे संविधान ने कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच स्पष्ट कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियां तय की हैं। यदि किसी संवैधानिक संस्था के आदेशों का सही ढंग से पालन नहीं होता या नागरिकों को न्याय पाने में अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ता है, तो यह देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। न्याय केवल कागजी आदेश जारी करने भर से सुनिश्चित नहीं होता, बल्कि उन आदेशों के प्रभावी अनुपालन से धरातल पर उतरता है।


चुनावी पारदर्शिता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुद्दे

देव ज्योति ने आगे कहा कि देश में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकारों की पूरी सुरक्षा, बिना निष्पक्ष सुनवाई के किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखने जैसे गंभीर आरोपों और पत्रकारों की स्वतंत्रता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है। संविधान के तहत नागरिकों को जितने भी अधिकार दिए गए हैं, वे केवल किताबों या दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका वास्तविक और प्रभावी संरक्षण भी सुनिश्चित होना चाहिए।


रचनात्मक आलोचना और संस्थाओं को सशक्त बनाने की पहल

उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में विभिन्न संस्थाओं की मजबूती और पारदर्शिता के लिए रचनात्मक आलोचना तथा संवैधानिक संवाद बेहद जरूरी हैं। हमारी या विपक्षी दलों की लड़ाई किसी भी संवैधानिक संस्था को कमजोर करने की कतई नहीं है, बल्कि उसे संविधान की मूल भावना के अनुरूप और अधिक सशक्त तथा जवाबदेह बनाने की है।


संविधान सर्वोपरि: जनता का न्याय व्यवस्था पर अटूट विश्वास

अपने बयान के अंत में वीआईपी प्रवक्ता ने कहा कि देश का संविधान सर्वोपरि है और जनता की प्रबल इच्छा है कि न्यायपालिका पूरी तरह निर्भीक होकर संविधान की रक्षा करे। ऐसा होने पर ही आम नागरिक का भरोसा देश की न्याय व्यवस्था और मजबूत लोकतंत्र पर हमेशा कायम रह सकता है।

देवांशु प्रभात की रिपोर्ट