Bharat Tiwari Encounter: महापंचायत के बाद भरत तिवारी एनकाउंटर पर बदले जीतनराम मांझी के सुर,दिल्ली-पटना तक बयानबाजी का गरम हो रहा मैदान

Bharat Tiwari Encounter: एक तरफ जहां बिलौटी गांव से लेकर आरा तक सर्व समाज महापंचायतों में न्याय की मांग को लेकर जनसैलाब उमड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाज़ी ने माहौल को और अधिक गरमा दिया है।..

Bharat Tiwari Encounter: महापंचायत के बाद भरत तिवारी एनकाउंट
महापंचायत के बाद भरत तिवारी एनकाउंटर पर बदले जीतनराम मांझी के सुर- फोटो : social Media

Bharat Tiwari Encounter: बिहार में भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामला अब केवल एक आपराधिक जांच का विषय नहीं रहा, बल्कि यह पूरी तरह से राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक विमर्श का केंद्र बन चुका है। एक तरफ जहां बिलौटी गांव से लेकर आरा तक सर्व समाज महापंचायतों में न्याय की मांग को लेकर जनसैलाब उमड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाज़ी ने माहौल को और अधिक गरमा दिया है। भोजपुर के बिलौटी गांव में आयोजित सर्व समाज महापंचायत में बड़ी संख्या में लोग जुटे और कथित एनकाउंटर को लेकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। इसी मुद्दे पर आरा में भी अलग महापंचायत हुई, जहां लोगों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आक्रोश व्यक्त किया। इन सभाओं ने स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।

इसी बीच  केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के स्वर भी बदल गए हैं। मांझी ने इस मामले पर सावधानीपूर्ण रुख अपनाते हुए कहा कि चूंकि न्यायिक जांच का आदेश पहले ही दिया जा चुका है, इसलिए इस समय किसी भी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया को प्रभावित न करने के लिए सभी को संयम बरतना चाहिए।

केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दूबे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मामले में सभी संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और जांच प्रक्रिया तेजी से जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने भी बयान देते हुए कहा कि सरकार ने मामले में त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है और न्यायिक जांच के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक तथ्य सामने आएंगे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने बताया कि पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर प्रथम दृष्टया मिली भूमिका के आधार पर दर्ज की गई है।

इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां न्याय, कानून व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही के सवाल एक साथ खड़े हैं। अब निगाहें न्यायिक जांच और पुलिस कार्रवाई पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि इस विवाद का अंतिम सच क्या सामने आता है।