बीपीएससी परीक्षा में हिंदी भाषी अभ्यर्थियों से भेदभाव का आरोप: छात्र नेता दिलीप कुमार ने की निष्पक्ष जांच की मांग
बिहार स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष और चर्चित छात्र नेता दिलीप कुमार ने बिहार लोक सेवा आयोग पर गंभीर आरोप लगाया है। दिलीप ने कहा है कि 70वीं बीपीएससी परीक्षा मे हिंदी भाषी और बिहार के मूल निवासी अभ्यर्थियों के साथ बड़े पैमाने पर भेदभाव किया गया है....
Patna : 70वीं बीपीएससी (BPSC) सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद से ही हिंदी भाषी अभ्यर्थियों में गहरा असंतोष और नाराजगी देखी जा रही है। बिहार स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष और चर्चित छात्र नेता दिलीप कुमार ने गुरुवार को आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। दिलीप कुमार का कहना है कि इस परीक्षा के परिणाम में हिंदी भाषी और बिहार के मूल निवासी अभ्यर्थियों के साथ बड़े पैमाने पर भेदभाव किया गया है, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हुआ है।
निबंध विषय की कॉपी जांचने के नियमों पर उठाए सवाल
मीडिया के साथ बातचीत के दौरान दिलीप कुमार ने मुख्य परीक्षा के नियमों में गुपचुप तरीके से किए गए बदलावों पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि मुख्य परीक्षा में 300 अंकों के निबंध विषय में पहले हिंदी भाषी और बिहारी अभ्यर्थी 200 या उससे अधिक अंक आसानी से ले आते थे। लेकिन इस बार बीपीएससी ने चुपके से एक नया निर्देश जारी कर दिया कि यदि किसी अभ्यर्थी को निबंध में 180 से अधिक अंक दिए जाते हैं, तो उस कॉपी की जांच मुख्य परीक्षक द्वारा दोबारा की जाएगी। छात्र नेता का आरोप है कि इस नियम से कॉपी जांचने वाले शिक्षकों के हाथ बांध दिए गए, जिसका सीधा नुकसान हिंदी माध्यम के छात्रों को हुआ।
हिंदी माध्यम की कॉपियों में अलग संकेत देने का आरोप
भेदभाव के आरोपों को और पुख्ता करते हुए दिलीप कुमार ने कहा कि इस बार निबंध विषय की कॉपियों में हिंदी मीडियम के अभ्यर्थियों के लिए अलग से कुछ विशेष संकेत (Signals) दिए गए थे, जो कि बेहद संदिग्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इससे पहले आयोजित हुई बीपीएससी की परीक्षाओं में कभी भी ऐसा नहीं किया जाता था। इस तरह के अलग संकेतों से कॉपियों के मूल्यांकन की गोपनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
अनारक्षित सीटों पर 60 फीसदी बाहरी अभ्यर्थियों का कब्जा
छात्र नेता ने परीक्षा के चयन आंकड़ों को सार्वजनिक करते हुए एक चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने बताया कि इस परीक्षा के तहत कुल 549 अनारक्षित (General/Unreserved) सीटों में से केवल 216 सीटों पर ही बिहारी अभ्यर्थियों का चयन हो सका है, जो कुल का महज 40 प्रतिशत है। इसके विपरीत, बिहार से बाहर के अन्य राज्यों के 333 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, जो कि कुल सीटों का 60 प्रतिशत है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस बात की गहन जांच होनी चाहिए कि आखिर बिहार के मेधावी छात्रों का चयन लगातार कम क्यों होता जा रहा है।
मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच और आंकड़े जारी करने की मांग
दिलीप कुमार ने इस पूरे मामले को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि बीपीएससी को तुरंत यह आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक करना चाहिए कि सफल अभ्यर्थियों में से कितने छात्रों ने वास्तव में बिहार के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से पढ़ाई की है। उन्होंने कहा कि सरकार को जांच करनी चाहिए कि क्या यह गिरावट बिहार की शिक्षा व्यवस्था की कमी के कारण है, कोचिंग संस्थानों की वजह से है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी साजिश और गड़बड़ी है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर हिंदी भाषी और बिहारी छात्रों को न्याय दिलाने की अपील की है।
नरोत्तम की रिपोर्ट