Bihar Political News : अशोक चौधरी का तमिलनाडु के मंत्री पन्नीरसेल्वम पर किया पलटवार, कहा आपकी कुंठा का ईलाज नहीं....
PATNA : तमिलनाडु के कृषि मंत्री एमआरके पनीरसेल्वम के विवादित बयान पर बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने पलटवार किया है। जिसमें उन्होंने कहा था की उत्तर के लोग तमिलनाडु में टेबल साफ करने आ रहे हैं। वे यहां मजदूरी, पानी पूरी बेचने आते हैं क्योंकि उन्होंने सिर्फ हिंदी सीखी है।" इसके उलट हमारे बच्चे विदेश जाते हैं... क्योंकि हम दो-भाषा नीति का पालन करते हैं और हमने अंग्रेजी अच्छी तरह सीखी है। वे विदेश जा रहे हैं और उन्हें करोड़ों कमाने के अवसर मिल रहे हैं... USA, लंदन में।" अशोक चौधरी ने कहा की आपकी कुंठा का ईलाज तो नहीं है MRK पन्नीरसेल्वम जी, लेकिन आपकी भ्रांतियां अवश्य दूर कर सकता हूं।
उन्होंने कहा की यह वही हिंदी भाषी बिहार है जहाँ आर्यभट्ट ने शून्य की खोज की, जहाँ चाणक्य ने राजनीति के सूत्र लिखे, जहाँ सम्राट अशोक ने अहिंसा का संदेश दिया। यह वही धरती है जहाँ नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों में दुनियाभर से विद्यार्थी ज्ञान अर्जित करने आते थे। यहीं बापू ने चंपारण में आजादी के लिए पहला सत्याग्रह किया और यहीं से लोकतंत्र की मजबूत नींव रखी गई। यह वही हिंदी भाषी बिहारी था जिसके संपूर्ण क्रांति आंदोलन से सरकारें हिल गई थीं और देश की दिशा बदल गई।
अशोक चौधरी ने कहा की आज भी यहाँ के बच्चे UPSC, IAS, IPS जैसी परीक्षाओं में देश में शीर्ष स्थान प्राप्त करते हैं। IIT, AIIMS और देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में बिहार के युवा अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। मुझे नहीं पता आप किन हिंदी भाषियों की बात कर रहे हैं, लेकिन अगर आपकी बात सच भी है तो यह हम बिहारवासियों के लिए गर्व की बात है कि इसी हिंदी भाषी धरती पर जन्मे नेताओं ने देश को बालिका शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और विकास की नई राह दिखाई है।
मंत्री ने कहा की आपको भले ही हिंदी और हिंदी भाषियों से परेशानी हो, लेकिन हमारे लिए यह गर्व का विषय है कि हमारे मेहनतकश कर्मयोगी अपने श्रम से न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं। हर क्षेत्र में - चाहे वो विज्ञान हो, प्रशासन हो, उद्योग हो या कला - बिहार के लोगों ने अपनी योग्यता सिद्ध की है। हमारी भाषा और हमारे लोगों पर प्रश्न उठाने से बेहतर होगा कि आप अपने प्रदेश और लोगों की बेहतरी पर ध्यान दें। इतिहास गवाह है कि भाषा और संस्कृति पर कटाक्ष करने वालों को समाज ने कभी स्वीकार नहीं किया। एकता और सम्मान से ही देश आगे बढ़ता है, विभाजनकारी सोच से नहीं।