Bihar News : भरत तिवारी एनकाउंटर के आरोपी डीएसपी की बिहार सरकार ने की ‘मलाईदार’ पोस्टिंग, उधर चिराग पासवान ने अमित शाह से की निष्पक्ष जांच की मांग

Bihar News : भरत तिवारी एनकाउंटर मामला अब गृह मंत्री अमित शाह के दरबार पहुंच गया है , केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग की है......पढ़िए आगे

Bihar News : भरत तिवारी एनकाउंटर के आरोपी डीएसपी की बिहार सर
अमित शाह से मिले चिराग पासवान - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर का मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। श्राद्धकर्म (13वीं) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी पीड़ित परिवार को सांत्वना देने और न्याय की मांग को मजबूत करने के लिए बिलौटी गांव में राजनीतिक नेताओं और विभिन्न संगठनों का जमावड़ा लगातार जारी है। इस बीच, इस पूरे प्रकरण ने राष्ट्रीय स्तर तक राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दरबार में पहुंचा मामला

इस जघन्य मामले की गूंज देश की राजधानी नई दिल्ली तक पहुंच चुकी है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से एक विशेष मुलाकात की। मुलाकात के दौरान चिराग पासवान ने बिहार के दो प्रमुख संवेदनशील मामलों को गृह मंत्री के सामने पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने राजगीर में पासवान समाज के दो युवकों की निर्मम हत्या और आरा (भोजपुर) में पुलिस द्वारा भरत तिवारी की कथित हत्या के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की। चिराग पासवान ने गृह मंत्री से दोनों मामलों में पूरी पारदर्शिता के साथ निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और पीड़ित परिजनों को जल्द से जल्द उचित न्याय दिलाने का विशेष आग्रह किया है।

आरोपी डीएसपी राजेश शर्मा का निलंबन खत्म, नई तैनाती पर छिड़ा विवाद

दूसरी तरफ, इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर बिहार सरकार के एक फैसले ने आग में घी डालने का काम किया है। कथित एनकाउंटर मामले में नामजद आरोपी और जगदीशपुर के तत्कालीन डीएसपी (एसडीपीओ) राजेश कुमार शर्मा को लेकर सरकार के हालिया रुख से हर कोई हैरान है। दरअसल घटना के बाद उठे जन-आक्रोश और मृत युवक की मां के आवेदन पर दर्ज हुई हत्या की प्राथमिकी के बाद डीएसपी राजेश शर्मा को हटाकर पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया गया था। लेकिन सरकार ने उनका निलंबन समाप्त करते हुए उन्हें 'मद्य निषेध विभाग' में एक बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी है।

सोशल मीडिया पर आक्रोश, मां ने कहा- 'जख्मों पर नमक'

प्रशासनिक गलियारों में मद्य निषेध विभाग के इस पद को काफी रसूखदार और 'मलाईदार' माना जाता है। ऐसे में न्यायिक और पुलिस जांच लंबित होने के बावजूद आरोपी अधिकारी को इतनी जल्दी और महत्वपूर्ण पोस्टिंग दिए जाने की सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हो रही है। विपक्षी दलों के साथ-साथ आम जनता भी सरकार की मंशा पर सवाल उठा रही है। इस फैसले पर भरत तिवारी की मां आशा देवी का दर्द एक बार फिर छलक पड़ा। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार आरोपियों को सजा देने और हमें न्याय दिलाने के बजाय उन्हें बड़ी जिम्मेदारियों से नवाज कर पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रही है।

क्या है पूरा मामला?

उल्लेखनीय है कि बीती 17 जून को बिलौटी गांव में स्थानीय सामाजिक मुद्दों को उठाने वाले युवक भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। पुलिस का दावा था कि युवक 'मानसिक रूप से विक्षिप्त' था और उसने आत्मरक्षा में फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस को गोली चलानी पड़ी। हालांकि, घटनास्थल के वायरल वीडियो और परिजनों के दावों के मुताबिक, भरत ने अपनी पिस्टल पुलिस के सामने फेंक कर आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया था, जिसके बाद भी उसे बेहद करीब से गोलियां मारी गईं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल पटना हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग भी मामले की जांच कर रहा है।

देबांशु प्रभात की रिपोर्ट