Bihar Education News: बिहार के स्कूलों में मचेगा हड़कंप! जुलाई में होगी बड़ी जांच, नियम तोड़े तो बंद होंगे विद्यालय, मचा हड़कंप
Bihar Education News: बिहार में जो स्कूल शिक्षा के अधिकार कानून और निर्धारित मानकों का पालन करते नहीं पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।...
Bihar Education News:बिहार में स्कूलों की मनमानी पर अब सरकार का शिकंजा कसने वाला है। शिक्षा विभाग ने सूबे के सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की सघन जांच कराने का बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के बाद निजी स्कूल संचालकों के बीच खलबली और बेचैनी का माहौल देखा जा रहा है। विभाग ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि जो स्कूल शिक्षा के अधिकार कानून और निर्धारित मानकों का पालन करते नहीं पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव विनोद सिंह गुंजियाल ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को पत्र भेजकर 1 जुलाई से 31 जुलाई तक राज्यव्यापी विशेष जांच अभियान चलाने का आदेश जारी किया है। यह अभियान सिर्फ कागजी खानापूर्ति नहीं होगा, बल्कि जमीनी हकीकत की पड़ताल की जाएगी। अधिकारियों की टीम स्कूलों में पहुंचकर व्यवस्थाओं की हकीकत का जायजा लेगी।
सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान स्कूल भवन की सुरक्षा, शिक्षक-छात्र अनुपात, खेल मैदान, शौचालय, पेयजल, कक्षाओं की स्थिति, फीस वसूली की प्रक्रिया और अन्य बुनियादी सुविधाओं की बारीकी से जांच होगी। विभाग यह भी देखेगा कि बच्चों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत मिलने वाली सुविधाएं वास्तव में उपलब्ध कराई जा रही हैं या नहीं।
इस विशेष अभियान की निगरानी प्रमंडलीय आयुक्तों को सौंपी गई है। वहीं जिलाधिकारी, उप विकास आयुक्त , अनुमंडल पदाधिकारी , जिला शिक्षा पदाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी को भी जांच प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इससे साफ है कि सरकार इस बार किसी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं है।
दरअसल, पिछले कई महीनों से अभिभावकों की ओर से मनमानी फीस वसूली, सुविधाओं की कमी और नियमों के उल्लंघन को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। कई स्कूलों पर बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता करने के आरोप भी लगे थे। इन्हीं शिकायतों के बाद सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है।
अब पूरे राज्य की नजर जुलाई में होने वाली इस जांच पर टिकी है। माना जा रहा है कि इस अभियान में कई निजी स्कूलों की पोल खुल सकती है और नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों पर प्रशासनिक कार्रवाई की गाज गिर सकती है। इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद भी जताई जा रही है।