Bihar Police Crime: माफियाओं से यारी, करोड़ों की संपत्ति पड़ी भारी! थानेदार पर ईओयू का शिकंजा, रडार पर एक आईपीएस ,दौलत का साम्राज्य देख दंग रह गए अफसर, विभाग में हड़कंप

Bihar Police Crime: आर्थिक अपराध इकाई की ताबड़तोड़ रेड में किशनगंज के तत्कालीन नगर थानेदार और वर्तमान में लाइन हाजिर अभिषेक कुमार रंजन की कथित अकूत दौलत का ऐसा जखीरा सामने आया कि जांच अधिकारी भी हैरान रह गए।

Kishanganj EOU Raid Exposes Wealth Trail of Police Officer
खाकी के पीछे काली कमाई का खेल!- फोटो : reporter

Bihar Police Crime: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच किशनगंज से ऐसा खुलासा हुआ है जिसने खाकी की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन हाथों में कानून की हिफाजत की जिम्मेदारी थी, उन्हीं पर काली कमाई का साम्राज्य खड़ा करने का इल्जाम लगा है। आर्थिक अपराध इकाई की ताबड़तोड़ रेड में किशनगंज के तत्कालीन नगर थानेदार और वर्तमान में लाइन हाजिर अभिषेक कुमार रंजन की कथित अकूत दौलत का ऐसा जखीरा सामने आया कि जांच अधिकारी भी हैरान रह गए।

मंगलवार की सुबह जब ईओयू की टीम ने पटना, किशनगंज और सारण में एक साथ दबिश दी तो किसी को अंदाजा नहीं था कि जांच का दायरा इतना बड़ा निकलकर सामने आएगा। रामकृष्णानगर स्थित आवास से लेकर किशनगंज के सरकारी आवास, सरकारी कार्यालय और सारण के पैतृक ठिकानों तक छापेमारी का जाल बिछाया गया। जैसे-जैसे दस्तावेज खंगाले गए, वैसे-वैसे कथित बेनामी संपत्तियों, निवेश और संदिग्ध लेन-देन की परतें खुलती चली गईं।

2009 बैच के दरोगा रहे अभिषेक कुमार रंजन पर आय से 115.66 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। ईओयू की जांच के मुताबिक उनकी वैध आय वेतन, लोन और अन्य स्रोतों को मिलाकर करीब 1.47 करोड़ रुपये है, जबकि कथित तौर पर उनके पास इससे कहीं अधिक संपत्ति और निवेश के सुराग मिले हैं। इसी आधार पर उनके खिलाफ करीब 1.70 करोड़ रुपये का डिस्प्रोपोर्शनट एसेट (डीए) केस दर्ज किया गया है।

जांच एजेंसियों के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा उनके कथित एक आईपीएस से संबंध को लेकर है जो अभी हैदराबद में ट्रेनिंग पर हैं, माफिया कनेक्शन की बात तो चारो ओर हवा में तैर रही है। सूत्रों की मानें तो जमीन, बालू और शराब के धंधे से जुड़े कई रसूखदार खिलाड़ियों के साथ उनके करीबी रिश्तों की पड़ताल की जा रही है। आरोप है कि इन नेटवर्कों से सांठगांठ कर मोटी रकम बनाई गई और उसी रकम को जमीन-जायदाद तथा अन्य निवेश में लगाया गया।

कहानी यहीं खत्म नहीं होती। जांच की सुई किशनगंज के निलंबित एसडीपीओ गौतम तक भी पहुंच रही है। बताया जाता है कि दोनों के बीच बेहद करीबी संबंध थे। पुलिस महकमे में चर्चा है कि एक आईपीएस और निलंबित एसडीपीओ गौतम दोनों की सिफारिश पर ही अभिषेक की अहम थाने में पोस्टिंग हुई थी। सूत्रों का दावा है कि दोनों के बीच दिनभर में दर्जनों बार बातचीत होती थी। जांच एजेंसियां अब कॉल डिटेल, वित्तीय लेन-देन और निवेश के तार जोड़ने में जुटी हैं। यहीं नहीं इस मामले में कथित तौर पर एक आईपीएस का नाम भी सामने आ रहा है। सूत्रों के अनुसार साहेब भी ईओयू के रडार पर हैं।

ईओयू की कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में खलबली मची हुई है। विभागीय कार्रवाई पहले ही शुरू हो चुकी थी और 11 अप्रैल को उन्हें लाइन क्लोज कर दिया गया था। अब निलंबन की तलवार भी उनके सिर पर लटक रही है। वहीं जांच एजेंसियों के रडार पर किशनगंज के कुछ अन्य पुलिस अधिकारी भी बताए जा रहे हैं।

फिलहाल ईओयू की टीम जब्त दस्तावेजों, बैंक खातों, संपत्ति के कागजात और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है। माना जा रहा है कि यह मामला केवल एक थानेदार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके तार एक बड़े नेटवर्क तक पहुंच सकते हैं।

खाकी और माफिया के कथित गठजोड़ की यह कहानी अब बिहार की सबसे चर्चित जांचों में शामिल हो चुकी है। आने वाले दिनों में कई और बड़े नामों के सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। सवाल यही है कि क्या यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश करेगी या फिर जांच की फाइलों में कुछ राज दफन होकर रह जाएंगे।

रिपोर्ट- रंजीत कुमार