बिहार शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: सस्पेंडेड DPO को मिली 'क्लीन चिट', निलंबन काल अब माना जाएगा 'On Duty'
बिहार शिक्षा विभाग ने तत्कालीन डीपीओ रवि कुमार को बड़ी राहत देते हुए उनके निलंबन काल को कर्तव्य अवधि (On Duty) मानने का आदेश जारी किया है।
Patna - बिहार शिक्षा विभाग ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सहायक निदेशक (SCERT) रवि कुमार के करियर पर लगे अनिश्चितता के बादलों को पूरी तरह साफ कर दिया है । विभाग ने आदेश दिया है कि रवि कुमार की निलंबन अवधि (28 नवंबर 2024 से 30 जून 2025) को 'कर्तव्य पर बिताई गई अवधि' माना जाएगा । यह फैसला न केवल उनके बकाया वेतन का रास्ता साफ करता है, बल्कि विभाग में उनकी निष्पक्ष छवि को भी पुनर्स्थापित करता है ।
विभागीय चक्रव्यूह और न्याय की लंबी डगर
यह मामला साल 2024 के अंत में शुरू हुआ था, जब दरभंगा में समग्र शिक्षा अभियान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) के पद पर तैनात रवि कुमार को कतिपय आरोपों के आधार पर निलंबित कर दिया गया था । अनुशासनिक कार्यवाही के तहत उनके खिलाफ जांच के आदेश दिए गए, जिससे उनके प्रशासनिक भविष्य पर सवालिया निशान लग गए थे । करीब सात महीने के निलंबन के बाद उन्हें जून 2025 में सेवा में वापस लिया गया और पटना के SCERT में पदस्थापित किया गया ।
जांच रिपोर्ट: जब आरोपों की नींव ही ढह गई
रवि कुमार के खिलाफ संचालित अनुशासनिक कार्यवाही में सच्चाई की जीत हुई । जांच के लिए नियुक्त संचालन पदाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि रवि कुमार पर लगाए गए सभी आरोप निराधार और अप्रमाणित थे । इस क्लीन चिट के आधार पर विभाग ने नवंबर 2025 में ही उन्हें तमाम आरोपों से मुक्त करते हुए मामले को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया था ।
अधूरे फैसले को मिला पूर्ण विराम
आरोपों से मुक्ति मिलने के बाद भी एक तकनीकी पेंच फंसा हुआ था—निलंबन काल के दौरान के वेतन और भत्तों का क्या होगा? रवि कुमार ने अपने अभ्यावेदन के जरिए विभाग से इस अवधि के सेवा निरूपण की गुहार लगाई थी । शिक्षा विभाग के अनुशासनिक प्राधिकार ने अब इस पर अंतिम मुहर लगा दी है, जिससे उनकी निलंबन अवधि अब 'सर्विस ब्रेक' के बजाय 'सर्विस पीरियड' का हिस्सा बन गई है ।
सक्षम प्राधिकार की मुहर और अंतिम आदेश
शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) मनोरंजन कुमार द्वारा जारी इस पत्र ने साफ कर दिया है कि यह निर्णय सक्षम प्राधिकार के पूर्ण अनुमोदन के बाद लिया गया है । इस फैसले की जानकारी महालेखाकार से लेकर शिक्षा मंत्री के आप्त सचिव तक को भेज दी गई है । यह आदेश बिहार के प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय है, जो दर्शाता है कि अंततः सत्य और निष्ठा की ही जीत होती है ।