Bihar Energy Push: बिहार में ऊर्जा क्रांति का बिगुल, उद्योगों को मिलेगा डेडिकेटेड पावर फीडर, बांका में परमाणु प्लांट की फिजिबिलिटी स्टडी

Bihar Energy Push: बिहार की औद्योगिक तरक्की को नई रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में बड़े और दूरगामी फैसलों की रूपरेखा तैयार कर ली है...

Bihar Energy Push Dedicated Feeders Nuclear Plant Study Buzz
बिहार में ऊर्जा क्रांति का बिगुल- फोटो : social Media

Bihar Energy Push: बिहार की औद्योगिक तरक्की को नई रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में बड़े और दूरगामी फैसलों की रूपरेखा तैयार कर ली है। सीआईआई बिहार सोलर एवं सतत ऊर्जा शिखर सम्मेलन में बुधवार को सरकार और उद्योग जगत के दिग्गजों ने मिलकर राज्य को ऊर्जा सरप्लस और ग्रीन एनर्जी हब बनाने का खाका पेश किया। इस दौरान यह घोषणा की गई कि अब औद्योगिक क्षेत्रों को डेडिकेटेड पावर फीडर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि उद्योगों को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली मिल सके।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ऊर्जा विभाग के सचिव अजय यादव ने कहा कि बिहार में बिजली की बढ़ती मांग राज्य की प्रगति का संकेत है। उन्होंने बताया कि राज्य में उपभोक्ताओं की संख्या अब 2 करोड़ 22 लाख से अधिक हो चुकी है और इस विशाल मांग को पूरा करने के लिए ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को लगातार मजबूत किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में करीब 3.80 लाख डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर कार्यरत हैं।

सम्मेलन में सबसे अहम चर्चा बिहार में परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर रही। ऊर्जा सचिव ने जानकारी दी कि एनटीपीसी के सहयोग से पटना से लगभग 250 किलोमीटर दूर बांका जिले में 700-700 मेगावाट की दो परमाणु ऊर्जा इकाइयों (कुल 1400 मेगावाट) की स्थापना के लिए फिजिबिलिटी स्टडी शुरू की गई है। यह कदम आने वाले समय में बिहार की ऊर्जा संरचना को पूरी तरह बदल सकता है।इसके अलावा राज्य में 45,000 मेगावाट तापीय ऊर्जा और 2,500 मेगावाट पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है। इससे बिहार को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

बिहार अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (बेडा) के प्रबंध निदेशक राहुल कुमार ने बताया कि बीते एक दशक में सुधारों और ढांचागत निवेश के चलते बिहार अब पहले की तुलना में पांच गुना अधिक बिजली की मांग को पूरा करने में सक्षम हो चुका है। उन्होंने कहा कि लखीसराय के कजरा में 2800 करोड़ रुपये की सौर ऊर्जा परियोजना पर काम जारी है, जहां देश की सबसे बड़ी एकीकृत बैटरी स्टोरेज प्रणाली विकसित की जा रही है, ताकि धूप न होने पर भी बिजली आपूर्ति बाधित न हो।

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी इस पहल का स्वागत किया। सीआईआई बिहार के पूर्व अध्यक्ष सचिन चंद्रा ने कहा कि किसी भी औद्योगिक अर्थव्यवस्था की नींव भरोसेमंद बिजली पर टिकी होती है। जैसे-जैसे बिहार में औद्योगिक गलियारे और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित हो रहे हैं, वैसे-वैसे ग्रीन एनर्जी अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुकी है।