बढ़ता बिहार, बदलता बिहार: प्रति व्यक्ति आय ₹76 हजार हुई, तमिलनाडु को दे रहा है टक्कर
Bihar Per Capita Income: बिहार ने आर्थिक प्रगति के मामले में देश के बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। वित्त मंत्री ने बताया कि बिहार 13.1 प्रतिशत की विकास दर के साथ देश में दूसरे स्थान पर है, जो राष्ट्रीय औसत (7.3%) से कहीं अधिक है।
बिहार ने आर्थिक प्रगति के मामले में देश के बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। वित्त मंत्री ने बताया कि बिहार 13.1 प्रतिशत की विकास दर के साथ देश में दूसरे स्थान पर है, जो राष्ट्रीय औसत (7.3%) से कहीं अधिक है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय अब बढ़कर 76 हजार रुपये हो गई है। सरकार का लक्ष्य इसे और बढ़ाने का है, जिसके लिए पूर्व मुख्य सचिव नवीन कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जो छह महीने में आय दोगुनी करने का रोडमैप तैयार करेगी।
अर्थव्यवस्था में बदलाव: विनिर्माण क्षेत्र का बढ़ता दबदबा
राज्य की अर्थव्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों में संरचनात्मक बदलाव (Structural Change) आया है। आंकड़ों के अनुसार, द्वितीयक क्षेत्र (Manufacturing & Construction) की हिस्सेदारी 21.1% से बढ़कर 26.8% हो गई है। इसका मतलब है कि बिहार में अब निर्माण और उद्योगों का विस्तार तेजी से हो रहा है। वहीं, प्राथमिक क्षेत्र (कृषि) और तृतीयक क्षेत्र (सेवा) की हिस्सेदारी में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जो इस बात का संकेत है कि राज्य अब केवल खेती पर निर्भर न रहकर औद्योगिक विविधीकरण की ओर बढ़ रहा है।
मजबूत राजकोषीय स्थिति और बढ़ता निवेश
बिहार सरकार की वित्तीय सेहत पहले के मुकाबले काफी सुधरी है। 2020-21 में राज्य का कुल व्यय 1.66 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 2.82 लाख करोड़ रुपये हो गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राजस्व प्राप्ति में कर (Tax) की हिस्सेदारी 70% से बढ़कर 84% हो गई है। सरकार अब अपना खर्च राजस्व के बजाय पूंजीगत विकास (सड़क, बिजली, बुनियादी ढांचा) पर अधिक कर रही है, जिससे राज्य में निवेश का माहौल और बेहतर हुआ है।
कृषि में नवाचार और भविष्य की रणनीति
खेती और पशुपालन के क्षेत्र में भी बिहार ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। धान, गेहूं और मक्का के साथ-साथ दूध और मछली उत्पादन में भारी वृद्धि हुई है। वित्त मंत्री ने गर्व से उल्लेख किया कि किसानों के घर तक बीज पहुंचाने वाला बिहार देश का पहला राज्य बन गया है। सरकार की आगामी नीति अब पूरी तरह से औद्योगिकीकरण और रोजगार सृजन पर केंद्रित है, ताकि बुनियादी ढांचे के विकास का लाभ सीधे आम आदमी की जेब और रोजगार तक पहुंच सके।