अब कोचिंग में सिर्फ पढ़ाई नहीं, सुरक्षा भी अनिवार्य: बिहार पुलिस ने जारी किए 15 कड़े निर्देश, छात्राओं के लिए विशेष इंतजाम

पुलिस ने राज्यभर के कोचिंग संस्थानों के लिए नई नियमावली जारी की है, जिसके तहत अनिवार्य पंजीकरण से लेकर कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन और फायर एनओसी (Fire NOC) जैसे मानकों को अनिवार्य कर दिया गया है।

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Patna - बिहार पुलिस ने राज्य में संचालित कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित करने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस नई नियमावली के तहत अब राज्य के हर कोचिंग संस्थान के लिए अनिवार्य पंजीकरण और कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराना आवश्यक कर दिया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों को पुख्ता करना और छात्रों को एक सुरक्षित एवं स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है। 

अनिवार्य पंजीकरण और सुरक्षा ऑडिट


नए निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक कोचिंग संस्थान को अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा और पंजीकरण संख्या को रिसेप्शन पर प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। सुरक्षा के मोर्चे पर, संस्थानों को सीसीटीवी निगरानी, बायोमेट्रिक हाजिरी और उचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, संस्थानों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था की गहराई से जांच करने के लिए 'सिक्योरिटी ऑडिट' कराने का भी परामर्श दिया गया है। 

अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंध

छात्रों की जान-माल की सुरक्षा के लिए अब कोचिंग संस्थानों को अग्निशामक विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (Fire NOC) लेना अनिवार्य होगा। परिसर में अग्नि, भूकंप या बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के लिए आवश्यक व्यवस्था के साथ-साथ स्टाफ और छात्रों के लिए समय-समय पर मॉक-ड्रिल प्रशिक्षण आयोजित करना होगा। साथ ही, आपातकालीन निकास और प्राथमिक उपचार की सुविधाओं को भी अनिवार्य श्रेणी में रखा गया है। 

छात्रों का मानसिक कल्याण और काउंसलिंग


बिहार पुलिस ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देते हुए करियर काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक परामर्श (Psychological Counselling) प्रदान करने की व्यवस्था करने को कहा है। यदि कोई छात्र असामान्य व्यवहार या अवसाद जैसी समस्या से ग्रसित पाया जाता है, तो संस्थान को तुरंत उनके अभिभावकों को सूचित करना होगा। इसके अलावा, नियमित कक्षाओं से अनुपस्थित रहने वाले छात्रों और उनके मॉक टेस्ट के प्रदर्शन की जानकारी भी अभिभावकों को मैसेज या नोटिफिकेशन के जरिए देनी होगी। 

महिला सुरक्षा और हेल्पलाइन की उपलब्धता

छात्राओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संस्थानों को '112 India App' के महिला सुरक्षा फीचर्स के बारे में जागरूकता फैलानी होगी। संस्थान के रिसेप्शन पर स्थानीय थाना, वरीय पुलिस पदाधिकारियों और आपातकालीन नंबर 112 के पोस्टर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, यदि संस्थान परिवहन सुविधा प्रदान करता है, तो वाहन चालकों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से कराना होगा ताकि छात्रों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

बिहार पुलिस द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइन्स के अनुसार, कोचिंग संस्थानों के लिए निम्नलिखित नियम अनिवार्य किए गए हैं: 

अनिवार्य पंजीकरण और स्टाफ सत्यापन

  • प्रत्येक संचालित कोचिंग संस्थान का पंजीकरण कराना अनिवार्य है।

  • संस्थान की पंजीकरण संख्या को रिसेप्शन पर प्रदर्शित करना आवश्यक होगा।

  • संस्थान में कार्यरत सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन (Police Verification) अनिवार्य रूप से कराना होगा।

  • यदि संस्थान परिवहन सुविधा देता है, तो चालक और सहायक का पुलिस वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य है।


  • सुरक्षा और डिजिटल निगरानी

  • पूरे परिसर में सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के माध्यम से निगरानी सुनिश्चित करनी होगी।

  • छात्रों और कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।

  • संस्थान के रिसेप्शन पर स्थानीय थाना, वरीय पुलिस अधिकारियों और आपातकालीन नंबर 112 के पोस्टर लगाने होंगे।

  • छात्राओं और स्टाफ को '112 India App' के 'Women Safety' फीचर्स के बारे में शिक्षित करना होगा。


  • आपदा प्रबंधन और इंफ्रास्ट्रक्चर

  • अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (Fire NOC) प्राप्त करना अनिवार्य है।

  • आग, भूकंप या बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के लिए समय-समय पर छात्रों और स्टाफ हेतु मॉक-ड्रिल का आयोजन करना होगा。

  • आपातकालीन निकास (Emergency Exit) और प्राथमिक उपचार (First Aid) की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।


  • स्वास्थ्य, स्वच्छता और मानसिक कल्याण

  • परिसर में साफ पेयजल और पुरुष व महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था अनिवार्य है।

  • छात्रों के लिए करियर काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक परामर्श (Psychological Counselling) प्रदान करना होगा।

  • अवसाद या असामान्य व्यवहार वाले छात्रों की पहचान कर उनके अभिभावकों को सूचित करने की व्यवस्था होनी चाहिए।


  • अभिभावकों के साथ संवाद

  • अनुपस्थित रहने वाले छात्रों के अभिभावकों को तुरंत सूचित करने का तंत्र विकसित करना होगा।

  • मॉक टेस्ट में छात्रों के प्रदर्शन की रिपोर्ट अभिभावकों को मैसेज या नोटिफिकेशन के जरिए तुरंत भेजनी होगी।

  • नामांकन के लिए दलालों का सहारा लेने वाले संस्थानों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्ट - अनिल कुमार