Bihar Expressway: मोकामा से पूर्णिया तक… बिहार के मेगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स को मिलेगी रफ्तार, रेलवे से अटकी मंजूरियों पर सरकार सख्त

Bihar Expressway: बिहार में सड़क संपर्क और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को नई ऊंचाई देने की दिशा में सरकार ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है।...

Bihar Pushes Key Expressways Seeks Faster Rail Approvals
बिहार के मेगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स को रफ्तार- फोटो : reporter

Bihar Expressway: बिहार में सड़क संपर्क और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को नई ऊंचाई देने की दिशा में सरकार ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। राज्य की महत्वाकांक्षी सड़क और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए पथ निर्माण विभाग ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में विभागीय सचिव पंकज कुमार पाल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य की कई बड़ी परियोजनाओं की प्रगति और उनसे जुड़े रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) निर्माण की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक में सबसे ज्यादा जोर उन परियोजनाओं पर दिया गया, जिनकी रफ्तार रेलवे से मिलने वाली तकनीकी स्वीकृतियों के कारण प्रभावित हो रही है। अधिकारियों ने बताया कि कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर परियोजनाओं में रेलवे लाइन को पार करने के लिए अत्याधुनिक आरओबी प्रस्तावित हैं, लेकिन कुछ मामलों में रेलवे की मंजूरी लंबित होने से कार्य प्रभावित हो रहा है।

सचिव पंकज कुमार पाल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि पूर्व मध्य रेलवे और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाकर सभी लंबित अनुमोदनों को जल्द से जल्द हासिल किया जाए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर इस विषय को रेलवे बोर्ड के चेयरमैन स्तर तक ले जाया जाएगा ताकि किसी भी परियोजना की गति बाधित न हो।

समीक्षा बैठक में राज्य और देश की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इनमें मोकामा–मुंगेर फोरलेन, पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे, रक्सौल–हल्दिया हाई स्पीड कॉरिडोर, गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे और आमस–दरभंगा एक्सप्रेसवे जैसी बहुप्रतीक्षित परियोजनाएं शामिल हैं। ये परियोजनाएं न केवल बिहार की कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगी, बल्कि व्यापार, उद्योग और क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा देंगी।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इन परियोजनाओं के तहत कई स्थानों पर रेलवे फाटकों की जगह आधुनिक रोड ओवर ब्रिज बनाए जाने हैं। आरओबी बनने से यात्रियों को लंबे समय तक रेलवे क्रॉसिंग पर इंतजार नहीं करना पड़ेगा और सड़क परिवहन अधिक सुरक्षित एवं सुगम हो जाएगा। बैठक के दौरान सचिव ने पूर्व मध्य रेलवे की ओर से डिजाइन अनुमोदन में हो रही देरी पर चिंता भी जताई। उन्होंने कहा कि तकनीकी स्वीकृतियों में विलंब का सीधा असर परियोजनाओं की समयसीमा पर पड़ता है। इसलिए संबंधित एजेंसियों को तेजी से कार्य करते हुए लंबित मामलों का समाधान निकालना होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बिहार के विभिन्न जिलों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। माल ढुलाई तेज होगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। साथ ही रेलवे फाटकों पर लगने वाले जाम से भी लोगों को राहत मिलेगी। बैठक में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के क्षेत्रीय अधिकारियों, विभिन्न परियोजनाओं के परियोजना निदेशकों, पथ निर्माण विभाग के वरिष्ठ अभियंताओं और अन्य संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया। सभी ने परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, रेलवे समन्वय और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।

सरकार का स्पष्ट संदेश है कि बिहार की आधारभूत संरचना को आधुनिक बनाने में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी बाधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब निगाहें इस बात पर हैं कि रेलवे से लंबित मंजूरियां कितनी जल्दी मिलती हैं और राज्य की ये मेगा परियोजनाएं कितनी तेजी से जमीन पर उतरती हैं।