Bihar Transfer News: खान विभाग के 22 और मद्य निषेध के 38 अधिकारियों का तबादला, बिहार प्रशासन में बड़ा फेरबदल, देखिए लिस्ट
Bihar Transfer News: बिहार सरकार ने प्रशासनिक मशीनरी को नई रफ्तार देने और विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है।...
Bihar Transfer News: बिहार सरकार ने प्रशासनिक मशीनरी को नई रफ्तार देने और विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। राज्य सरकार ने बिहार प्रशासनिक सेवा के 60 अधिकारियों का तबादला करते हुए मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग तथा खान एवं भूतत्व विभाग में व्यापक स्तर पर नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस फैसले को सरकार की प्रशासनिक कसावट और विभागीय जवाबदेही मजबूत करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
जारी अधिसूचना के अनुसार मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के 38 अधिकारियों का तबादला किया गया है। इनमें 14 मद्य निषेध अधीक्षक, तीन सहायक निबंधन महानिरीक्षक (एआईजी), चार जिला अवर निबंधक और 17 अवर निबंधक शामिल हैं। उमाशंकर प्रसाद को शिवहर, लाला अजय कुमार सुमन को नालंदा, नित्यानंद प्रसाद को अरवल, रणधीर कुमार सिंह को सुपौल, सीमा चौरसिया को पश्चिम चंपारण (बेतिया), मनोज कुमार सिंह को समस्तीपुर तथा गौतम कुमार को कैमूर का मद्य निषेध अधीक्षक बनाया गया है। वहीं विभिन्न प्रमंडलों और निबंधन कार्यालयों में भी कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
इधर खान एवं भूतत्व विभाग में भी 22 अधिकारियों का तबादला कर खनन प्रशासन में नई तैनाती की गई है। कार्तिक कुमार को पटना का खनिज विकास पदाधिकारी बनाया गया है, जबकि घनश्याम झा को दरभंगा, सर्वेश कुमार संभव को सारण, कुमार गौरव को भोजपुर, नवेंदु सिंह को गया, इमरान अंसारी को शिवहर, हरेश कुमार को औरंगाबाद तथा आकांक्षा प्रियदर्शी को बेगूसराय के साथ खगड़िया का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसके अलावा कई अधिकारियों को उप निदेशक और विभागीय मुख्यालय में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।



सरकार का मानना है कि इस व्यापक प्रशासनिक पुनर्व्यवस्था से विभागों की कार्यकुशलता बढ़ेगी, जबकि राजनीतिक गलियारों में इस तबादले को प्रशासनिक संदेश और सुशासन की दिशा में सरकार की नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नई तैनाती के बाद अधिकारी सरकार की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरते हैं और विभागीय कामकाज में कितना बदलाव दिखाई देता है।