चिराग पासवान की माँ बनेंगी राज्यसभा सांसद ! बुरे फंसे उपेंद्र कुशवाहा और तेजस्वी यादव, NDA ने बनाया 5 सीट जीतने का प्लान
बिहार में जिन 5 सीटों पर चुनाव होंगे उसमें चुनाव जीतने के लिए एक सीट पर कम से कम 41 विधायकों का समर्थन चाहिए. ऐसे में चिराग पासवान इस बार बड़ा खेला कर सकते हैं.
Rajya Sabha Election : केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) का सियासी कद और ज्यादा बढने जा रहा है. पहले लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने और फिर बिहार विधानसभा चुनाव में 19 विधायकों वाली पार्टी होने के बाद अब चिराग की नजर 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव पर है. वे इस बार अपनी माँ रीना पासवान को राज्यसभा भेजने की तैयारी में हैं. वहीं चिराग की इस रणनीति से सबसे बड़ा झटका उपेंद्र कुशवाहा को लग सकता है.
दरअसल, भारत निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा की 37 सीटों पर चुनाव की तारीखों का ऐलान बुधवार को कर दिया गया। 10 राज्यों की इन सीटों के लिए मतदान 16 मार्च को कराया जाएगा। अलग-अलग राज्यों में खाली हो रही सीटों पर यह चुनाव प्रक्रिया एक साथ पूरी की जाएगी। इन सीटों में महाराष्ट्र की 7, तमिलनाडु की 6, पश्चिम बंगाल और बिहार की 5-5 सीटों पर मतदान होगा। वहीं ओडिशा में 4, असम में 3, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में 2-2 सीटों पर चुनाव होंगे। वहीं हिमाचल प्रदेश में 1 और तेलंगाना में 2 सीटों पर वोट डाले जाएंगे।
बिहार की जिन 5 सीटों पर रिक्तियां हो रही हैं उसमें राजद के अमरेन्द्र धारी सिंह और प्रेम चंद गुप्ता का कार्यकाल पूरा हो रहा है. इसके अतिरिक्त जदयू के रामनाथ ठाकुर और हरिवंश नारायण सिंह तथा रालोमो के उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल भी 9 अप्रैल 2026 को पूरा हो रहा है. ऐसे में बिहार विधान सभा में सियासी दलों के विधायकों की संख्या के हिसाब से इस बार कई सदस्यों के फिर से राज्यसभा जाने का रास्ता मुश्किल है. इसमें न सिर्फ राजद बल्कि जदयू को झटका लगना तय है. वहीं उपेंद्र कुशवाहा के लिए स्थिति पेशोपेश वाली है.
भाजपा के सबसे अधिक MLA
दरअसल, बिहार विधानसभा में मौजूदा समय में सर्वाधिक 89 विधायक भाजपा के हैं. वहीं जदयू के 85 और लोजपा (रा) के 19 हैं. इसके अतिरिक्त एनडीए के दो अन्य घटक दलों में हम के 5 और रालोमो के 4 विधायक हैं. वहीं विपक्षी खेमे में राजद के 25, कांग्रेस के 6, वामदलों के 3 और आईआईपी के एक विधायक हैं. यानी महागठबंधन के सिर्फ 35 विधायक हैं. इनके अतिरिक्त एआईएमआईएम के 5 और बसपा के 1 विधायक किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं.
कितने विधायक का चाहिए समर्थन
बिहार में जिन 5 सीटों पर चुनाव होंगे उसमें चुनाव जीतने के लिए एक सीट पर कम से कम 41 विधायकों का समर्थन चाहिए. ऐसे में संख्याबल के हिसाब से महागठबंधन के कुल विधायकों की संख्या सिर्फ 35 है. इस स्थिति में अगर राजद को एक सीट पर भी जीत चाहिए तो उसे एआईएमआईएम और बसपा का समर्थन चाहिए. इस स्थिति में राजद से सिर्फ एक का ही निर्वाचन राज्यसभा के लिए होगा.
नितिन नबीन जाएंगे राज्यसभा
राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने वाले चेहरों में इस बार बिहार से सबसे बड़ा नाम नितिन नबीन का होगा. वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं, ऐसे में वे अब बिहार विधानसभा से विधायक पद से इस्तीफा देकर उच्च सदन में जाएंगे. भाजपा के 89 विधायक हैं तो उनका निर्वाचन आसानी से हो जाएगा. इसके अलावा जदयू के दो सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. जदयू के फ़िलहाल 85 विधायक हैं तो उनके दो लोगों का निर्वाचन तय माना जा रहा है. इसमें 75 साल के केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और 69 वर्ष के राज्यसभा उप सभापति हरिवंश को फिर से भेजा जाएगा या नहीं इस पर फ़िलहाल पार्टी की ओर से कुछ नहीं कहा जा रहा है.
उपेंद्र कुशवाहा की टेंशन बढ़ाएंगे चिराग
रिक्त हो रही पांच सीटों में एक पर राजद, दो पर जदयू और एक पर भाजपा के उम्मीदवार का निर्वाचन तय माना जा रहा है. इस स्थिति में उपेंद्र कुशवाहा का फिर से निर्वाचन होना मुश्किलों भरा हो सकता है. खासकर चिराग पासवान की पार्टी के 19 विधायक और कुशवाहा के सिर्फ 4 विधायक होने के कारण रालोमो प्रमुख की टेंशन बढ़ सकती है. चिराग पासवान से जुड़े सूत्रों की मानें तो वे एक राज्यसभा सीट पर दावा ठोक सकते हैं. इस स्थिति में उपेंद्र कुशवाहा को अपनी सीट छोडनी पड़ेगी. चिराग पासवान की माँ रीना पासवान पार्टी की ओर से उम्मदीवार हो सकती हैं.
राजद को लगेगा NDA का झटका
NDA से जुड़े सूत्रों की मानें तो बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बाद अब NDA की पहली कोशिश राज्यसभा चुनाव में रजद को झटका देने की है. चुकी महागठबंधन के सिर्फ 35 विधायक हैं. वहीं NDA से 4 उम्मीदवार राज्यसभा सीटों पर आसानी से जीत सकते हैं. पांचवी सीट के लिए अगर महागठबंधन में क्रॉस वोटिंग कराने में NDA सफल रहा या फिर एआईएमआईएम की सदन से अनुपस्थिति रही तो NDA को पांचों सीट पर जीत मिल सकती है. माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव में कुछ ऐसी ही रणनीति के साथ NDA उतरेगा