Republic Day 2026: 26 नवंबर को बना संविधान 26 जनवरी को क्यों हुआ लागू, क्यों चुनी गई ये तारीख, जानिए इसके पीछे का रहस्य
Republic Day 2026:यदि संविधान 26 नवंबर 1949 को बना था तो फिर इसे 26 जनवरी 1950 में क्यों लागू किया गया? बने बनाएं संविधान को लागू करने में आखिरी 2 महीने क्यों लगे? इन दो महीनों में क्या क्या हुआ? 26 जनवरी की तारीख ही संविधान लागू करने के लिए क्यों चु
Republic Day 2026: देश आज अपना 77 वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। गणतंत्र दिवस को लेकर देशभर में उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह से ही देशभक्ति गाने हर तरफ सुनाई दे रहे हैं। संविधान का लागू हुए आज 76 साल हो गए हैं। ऐसे में आज के दिन सबसे अहम सवाल आपके मन में आता होगा कि संविधान कब बना था? तो आपको बता दें कि, हमारा संविधान 26 नवंबर 1949 में बना था। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी। संविधान बनाने में कुल 2 साल 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था। संविधान बनाने के लिए संविधान सभा की 11 सत्रों में 165 से अधिक बैठकें की गई। हर अनुच्छेद पर विस्तार से चर्चा और तीखें बहसें भी हुई। जिसके बाद जाकर संविधान तैयार हुआ।
26 नवंबर को बना फिर 26 जनवरी को क्यों हुआ लागू?
अब दूसरा अहम सवाल खड़ा हो रहा है कि यदि संविधान 26 नवंबर 1949 को बना था तो फिर इसे 26 जनवरी 1950 में क्यों लागू किया गया? बने बनाएं संविधान को लागू करने में आखिरी 2 महीने क्यों लगे? इन दो महीनों में क्या क्या हुआ? 26 जनवरी की तारीख ही संविधान लागू करने के लिए क्यों चुना गया? आइए इन सभी सवालों के जवाब को जानते हैं।
कब बना संविधान
भारतीय संविधान को 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने स्वीकार किया। 2 साल 11 महीने 18 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद 26 नवंबर को संविधान सभा ने इसे स्वीकर कर दिया। जिसके बाद संविधान को लागू करने की प्रकिया शुरु की गई।
कब लागू हुआ संविधान
भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। संविधान को मंजूरी मिलने के करीब 2 महीने के बाद इसे लागू किया गया।
क्यों चुना गया 26 जनवरी?
अब जानते हैं कि आखिर संविधान को लागू करने के लिए 26 जनवरी की ही तारीख को क्यों चुना गया? तो इसके पीछे एक खास वजह है... इसके पीछे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। दरअसल, 26 जनवरी 1930 को कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी। 31 दिसंबर 1929 की मध्यरात्रि में लाहौर के रावी नदी के तहत पर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार तिरंगा फहराया था। इस दौरान उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष भी चुना गया था। इसी अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की मांग की गई और फैसला लिया गया कि जनवरी के अंतिम रविवार को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। यह तारीख 26 जनवरी 1930 थी। जिसके बाद तय तारीख को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। इसके बाद हर साल 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाने की परंपरा शुरु हो गई थी। जब देश को आजादी मिल गई और देश ने अपना संविधान भी तैयार कर लिया तो संविधान निर्माताओं ने सोचा कि जिस दिन देश ने पूर्ण स्वतंत्रता का संकल्प लिया था उसी दिन हम अपना खुद का संविधान भी लागू करेंगे।
बीच के 2 महीनों में क्या क्या हुआ?
भारतीय संविधान के बनने और लागू होने के बीच के दो महीने में नए गणराज्य की व्यवस्था तैयार की गई। राष्ट्रपति, न्यायपालिका, प्रशासनिक ढांचा तय किया गया। 1935 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट से संविधान में व्यवस्थित रूप से बदलाव किया गया। जिसका नतीजा हुआ कि 26 जनवरी 1950 को भारत एक गणराज्य बना। देश को अपना पहला राष्ट्रपति मिला और इसी दिन से संविधान पूरी तरह लागू हुआ। इसी वजह से आज भी हम 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रुप में मनाते हैं। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान पूरी तरह लागू हुआ और देश एक संप्रभु गणराज्य बना।
संविधान में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की भूमिका क्या थी?
डॉ. बी.आर. अंबेडकर भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार थे। उनकी भूमिका की बात करें तो वो संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष थे। संविधान के अंतिम मसौदे (Draft) को तैयार करने की मुख्य जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। उन्होंने विभिन्न देशों के संविधानों का अध्ययन कर भारत के लिए व्यावहारिक और लोकतांत्रिक संविधान तैयार किया। मौलिक अधिकारों, समानता, सामाजिक न्याय और अस्पृश्यता के अंत को संविधान में मजबूती से शामिल कराया। संविधान सभा की बहसों में उन्होंने कानूनी तर्कों से संविधान का बचाव किया। संविधान को आकार देने, लिखने और मजबूत बनाने में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। संविधान भले ही संविधान सभा ने बनाया, लेकिन उसे आकार देने, लिखने और टिकाऊ बनाने का सबसे बड़ा श्रेय डॉ. भीमराव अंबेडकर को जाता है। इसीलिए उन्हें “भारतीय संविधान के शिल्पकार” कहा जाता है।